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हंगामा मारपीट की नौबत

व्यापार संघ चलाने वाले भाजपा के नेता बुरी तरह से उखड़ गए

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हंगामा मारपीट की नौबत
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मेरठ/ धरने पर बैठे व्यापारियों को खुद को सपा नेता कहने वाले एक शख्स ने जब खाने के पैकेट बांटने शुरू किए तो इस पर व्यापार संघ चलाने वाले भाजपा के नेता बुरी तरह से उखड़ गए। वहां पर हंगामा हो गया और नौबत मारपीट तक पहुंच गयी। अच्छी बात यह रही कि खुद व्यापारियों ने ही बीच में पड़कर दोनों पक्षों को शांत किया। दरअसल हुआ यह कि खुद को समाजवादी पार्टी से जुड़ा होने का दावा करने वाला एक वहां गाड़ी में भर कर खाने के पैकेट लेकर पहुंच गया। ये पैकेट धरने पर भूखे प्यासे बैठे व्यापारियों में बांटे जाने लगे। व्यापारियों ने उन पैकेटों को स्वीकार भी कर लिया। यहां देखकर वहां मौजूद भाजपा के नेता हत्थे से उखड़ गए। उन्होंने खान बांट रहे कथित सपाई पर आपदा में अवसर तलाशने का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया। व्यापार संघ चलाने वाले भाजपा के नेता इन सपाइयों से उलझ गए। वहां हंगामा शुरू हा ेगया। हालांकि हंगामा बढ़ने से पहले ही सेंट्रल मार्केट के कुछ लोग बीच में आ गए। दोनों को अलग कर दिया। बाद में भाजपा के व्यापारी नेताओं ने कहा कि व्यापारी कभी भी भूखा नहीं रह सकता। खाना बांटने वाले केवल राजनीति करने आए हैं। यहां राजनीति नहीं करने दी जाएगी।

विनीत शारदा को सुनाई खरीखोटी

भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ संयोजक विनीत शारदा सेंट्रल मार्केट के धरना स्थल पर जा पहुंचे। उन्हें देखकर वो महिलाएं व्यापारी भड़क गयीं जिनकी दुकानें सील कर दी गयीं। उन्होंने विनीत शारदा को खूब खरीखोटी सुनाई। इन महिलाओं का कहना था कि आपकी सरकार है आपने क्या किया है। शारदा चुपचाप मुंह नीचा किए जो भी कुछ वो कह रही थीं स़नते रहे। हालांकि बाद में जब भाषण की बारी आयी तो विनीत शारदा ने दिल की भड़ास निकाल डाली। उनका भाषण सेंट्रल मार्केट की समस्या के इतर बाद में चुनावी भाषण की तर्ज पर नजर आया। वैसे जहां तक नेताओं के भाषण का सवाल है तो जिसके हाथ में भी धरना स्थल पर माइक आया, उसने चुनावी भाषण ही दिया। एक दूसरे की सरकार की पार्टी पर व्यापारियों की अनदेखी करने के आरोप लगाए।

बंद का असर बाजार से ज्यादा सरकारी दफ्तरों पर

मेरठ/सेंट्रल मार्केट के नाम बुलाए गए मेरठ बंद का असर महानगर के बाजारों से ज्यादा नगर निगम सरीखे सरकारी दफ्तरों पर अधिक दिखाई दिया। आज सुबह जब यह संवाददाता करीब सवा दस बजे नगर निगम पहुंचा तो वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। आमतौर पर निगम में दस बजे तक कर्मचारियों की आमद शुरू हो जाती है। लेकिन आज सुबह 11 बजे तक इक्का दुक्का कर्मचारी ही नजर आ रहे थे। इनमें भी वो कर्मचारी थे जो चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी हैं। जब इनसे कर्मचारियों के ना आने का कारण पूछा गया तो बताया गया कि आज मेरठ बंद है। जो नहीं पहुंचे हैं उनके घर नगर निगम से काफी दूर हैं और ऐसे कर्मचारी आटो या ई-रिक्शा से आते हैं। मेरठ बंद कराने वाले ई रिक्शा व ऑटो भी नहीं चलने दे रहे हैं। इस कारण आज कर्मचारी कम संख्या में नजर आ रहे हैं। हो सकता है कि कुछ विलंब से पहुंच जाएं, लेकिन 12.30 बजे तक भी निगम की खाली सीटें कर्मचारियों के आने का इंतजार करती रहीं। हां इतना जरूर है कि पूरे निगम दफ्तार में जहां अन्य कक्षों में सन्नाटा सरीखा नजारा था, वहीं दूसरी ओर जहां हाउस टैक्स की रकम जमा की जाती है वहां जरूर चहल पहल दिखी।
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