मेरठ/करीब चालिस साल पुराने जिस पंडित जी वैष्णों ढावे को एसजीएम गार्डन के सामने तिकोने की जगह दी गयी थी उसको वहां से भी हटा दिया गया है। दरअसल पंड़ित जी वैष्णो ढावा को रैपिड प्रोजेक्ट के कार्य के चलते उसको वहां से हटा दिया गया जहां वह करीब चालिस साल से काम कर रहा था। उससे वादा किया गया था कि उसको कैंट क्षेत्र में ही दूसरी जगह दे दी जाएगी। वह मान भी गया और विगत दिनों कैंट विधायक अमित अग्रवाल व बोर्ड के मनोनीत सदस्य डा. सतीश शर्मा की मौजूदगी में उसको एसजीएम गार्डन के सामने तिकौने वाली जगह आवंटित कर दी गयी, लेकिन कल सुबह अचानक उसका सामान वहां से हटा दिया गया।
यह है पूरा मामला
रैपिड प्रोजेक्ट के तहत मेट्रो स्टेशन बेगमपुल (कैंट गेट नंबर 4 के पास) से पंड़ित जी वैष्णों ढाब वालों को हटाया गया था। इसके बाद पुनर्वास के नाम पर पहले एसएसडी बॉयज इंटर कॉलेज की दीवार के पास स्थान दिया गया, जहां ढाबा संचालक ने एंगल और लोहे की चादर लगाकर ढाबा तैयार किया, लेकिन विद्यालय के विरोध के चलते उसे वहां से भी हटना पड़ा। ढाबा संचालक का कहना है कि वह पिछले कई वर्षों से उक्त स्थान पर अपना व्यवसाय कर रहा था तथा मामले को लेकर उच्च न्यायालय में प्रार्थना पत्र भी प्रस्तुत किया गया था, जिसके आधार पर उसे हटाए जाने पर रोक लगा दी गयी थी। इसके बावजूद उसे ‘वैकल्पिक व्यवस्थाÓ के नाम पर मूल स्थान से हटाया गया, और अब नई चिन्हित जगह एसजीएम गार्डन के तिकोने से भी बिना स्पष्ट नोटिस कार्रवाई कर दी गई। यदि मामला न्यायालय के संज्ञान में था तो क्या नियमानुसार प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं, तथा पुनर्वास के नाम पर की गई कार्रवाई कितनी पारदर्शी और न्यायसंगत है। ढावा संचालक ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 6 बजे कैंट बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंचकर ढाबे पर लगी लोहे की चादर और एंगल जब्त कर लिए और पूरा सामान अपने कार्यालय ले गई। इस दौरान मौके पर मौजूद लोगों को हटाकर कार्रवाई की गई।
‘जब खुद बसवाया, तो फिर क्यों उजाड़ा ‘
पूरा मामला अब इस सवाल के इर्द-गिर्द घूम रहा है कि जब जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी में खुद स्थान चिन्हित कर ढाबा बनवाया गया, तो महज 10 दिन के भीतर ही उसे हटाने की नौबत क्यों आई? क्या पुनर्वास की प्रक्रिया केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। हालांकि ढावा संचालक राज ने बताया कि उसने पूरे मामले की जानकारी कैंट विधायक को दी है। कैंट विधायक इन दिनों बाहर हैं। वह सीईओ कैंट से भी मिल चुका है। उन्होंने बताया कि जो जगह दी गयी थी वो जगह डीईओ लैंड है। वहां नहीं दी जा सकती। कोई अन्य वैकल्पिक स्थान की व्यवस्था का प्रयास किया जा रहा है।
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