हरिद्वार। 9 दिन तक चले चैत्र नवरात्रि का भव्य समापन हुआ। इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार में आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिला। अध्यात्मिक गुरु बाबा रामदेव की अगुवाई में यहां अष्टमी और महानवमी के पावन पर्व पर कन्या पूजन (कंजक पूजन) और कन्या भोज का विशेष आयोजन किया गया।
इस आयोजन में छोटी‑छोटी कन्याओं को साक्षात देवी स्वरूप मानकर उनके चरण धोए गए, आरती उतारी गई और उन्हें सात्विक भोजन कराया गया। इस दौरान उन्हें उपहार भेंट कर नारी शक्ति के सम्मान का संदेश दिया गया। पतंजलि योगपीठ परिसर में भक्ति, श्रद्धा और सनातन संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
बाबा रामदेव ने रामनवमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि नवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण और दिव्यता की स्थापना का समय है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर भगवान राम, कृष्ण और माँ भवानी की दिव्यता का वास होना चाहिए, यही सनातन धर्म का मूल तत्व है। बाबा ने जोर देकर स्पष्ट किया कि “केवल खुद को हिंदू कहना पर्याप्त नहीं, बल्कि हिंदुत्व और सनातन का वास्तविक अर्थ यह है कि माँ भगवती की शक्ति और उनके स्वरूप को आत्मसात किया जाए”।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में नारी शक्ति का सम्मान करें और धर्म के मूल सिद्धांतों को अपनाकर समाज को सशक्त बनाएं। इस धार्मिक अनुष्ठान में हजारों भक्तों ने भाग लिया और पतंजलि योगपीठ के विशाल परिसर में नवरात्रि का आध्यात्मिक वातावरण स्पष्ट रूप से अनुभव किया।
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