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हवन के साथ शिव कथा का समापन

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हवन के साथ शिव कथा का समापन
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शिव कथा में अंतिम दिवस ‘जय माता दी के जयकारों से गूँज उठा पण्डाल

मेरठ। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बुद्धा गार्डन में आयोजित सात दिवसीय भगवान शिव कथा के अंतिम दिवस पर गुरुदेव सर्वश्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य, कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने उपस्थित शिव भक्तों को श्री गणेश उत्पत्ति एवं महिषासुर मर्दन की कथा सुनाई। कथाव्यास जी ने देवी चरित्र की व्याख्या करते हुए बताया कि माता महिषासुरमर्दिनी का प्राकट्य तब हुआ जब समस्त देवताओं ने अपनी शक्तियों का एकीकरण किया। सभी के संगठित प्रयासों से ही वह शक्तिपुंज साकार हुआ, जिसने महिषासुर जैसे दुर्दांत दैत्य का अंत किया। आज भी यदि समाज से आतंक, भेदभाव, द्वेष, घृणा और नफरत रूपी महिषासुर का अंत करना है, तो उसी प्रकार के संगठन की आवश्यकता है, जहाँ सबके मन और मत एक हों। जहाँ ‘संगच्छध्वं संवदध्वंÓ की ध्वनि गुंजायमान हो—और यह केवल ब्रह्मज्ञान द्वारा ही संभव है।
शिव परिवार देता है संदेश
यही संदेश महादेव भी अपने दिव्य चरित्र के माध्यम से जनमानस को प्रदान करते हैं। यदि हम शिव परिवार की झांकी देखें, तो वहाँ पर विपरीत प्रकृति के जीव भी सामंजस्य का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। मयूर का भोजन साँप है, साँप का भोजन मूषक है, और बैल सिंह का भोजन है—किन्तु शिव परिवार में सभी जीव बिना किसी को हानि पहुँचाए समरस भाव से एक साथ रहते हैं, क्योंकि वहाँ चैतन्य शिव स्वयं प्रकट रूप में विद्यमान हैं। यही प्रेम और सौहार्द्र की अनुपम झांकी साकार करने का महासूत्र है। आज यदि समाज में एकजुटता और प्रेम को पुन: स्थापित करना है, तो ब्रह्मज्ञान के माध्यम से उसी चैतन्य शिव को प्रत्येक प्राणी के अंत:करण में प्रकट करना होगा। जब व्यक्ति ब्रह्मज्ञान द्वारा अपने भीतर शिव का साक्षात्कार करता है, तो वह मन और बुद्धि के समस्त भेदों से ऊपर उठकर समाज-निर्माण में अपनी सशक्त भूमिका निभाता है।
हर क्षण हो आनंद का उत्सव
दिव्य गुरुदेव आशुतोष महाराज समाज के प्रत्येक व्यक्ति को यही ब्रह्मज्ञान प्रदान कर जन-जन में दैवीय गुणों—जैसे एकता, शांति, प्रेम और सद्भावना—का संचार कर रहे हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान इसी ब्रह्मज्ञान के लिए समाज के हर वर्ग का आह्वान करता है, ताकि इस धरती को ही स्वर्ग बनाया जा सके—जहाँ हर दिन, हर पल, हर क्षण आनंद का उत्सव हो। संस्थान की मेरठ शाखा की संयोजिका – साध्वी आर्या भारती ने ईश्वर दर्शन को दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की यूएसपी बताते हुए बुलंद स्वर में ये कहा कि आज भी भोलेनाथ आते हैं यदि उन्हें शास्त्रीय विधि के द्वारा अपने अंतरघट में आमंत्रित किया जाए। आज इस कथा के माध्यम से हम आपको वही शाश्वत ब्रह्मज्ञान प्रदान करने आए हैं जिसकी ध्यान-साधना से आप भी महादेव के साथ एकरूपता को प्राप्त कर पाएंगे। मंच पर आसीन गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज के संगीतज्ञ शिष्य-शिष्याओं द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण भजनों को सुन, सभी श्रद्धालु आनंदित हो उठे। यह विलक्षण सात दिवसीय आयोजन कथा-व्यास पूजन, दिव्य आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ सफलता-पूर्वक संपन्न हुआ।

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