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छह सप्ताह में निर्णय लें नगरायुक्त मेरठ

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शहीद की विधवा को दिया जाए 25 बीघा जमीन का टुकड़ा, नगरायुक्त को छह सप्ताह के भीतर निर्णय के आदेश

इलाहाबाद/मेरठ। शहीद की विधवा को इंसाफ देने में 39 साल का वक्त लगा। हालांकि इंसाफ तभी पूरा माना जाएगा जब नगर निगम मेरठ उसको हाईकोर्ट के आदेश पर पेट पालने के लिए जमीन का टुकड़ा दे देगी। यह कहानी कीर्ति चक्र से सम्मानित शहीद अजमेर अली की है। जिनकी विधवा अबरीशा खातून को सरकार से अपना हक लेने के लिए अदालती लड़ाई लड़नी पड़ी।

यह है पूरा मामला

अंबरीश खातून की ओर से हाईकोर्ट में पैरवी करने वाले सीनियर एडवोकेट सुनील चौधरी ने बताया कि मेरठ जिले की रहने वाली अबरीशा खातून पत्नी स्वर्गीय श्री अजमेर अली कीर्ति चक्र सम्मानित निवासी ग्राम शोभापुर रोहता रोड मेरठ के पति 1987 में आर्मी सैपर आपरेटर के रूप में लेह लद्दाख में 1800 फिट की ऊंचाई पर तैनात शून्य से नीचे तापमान पर बर्फ हटाने के लिए तैनात किया गया था मौसम बेहद बादल भरा था । वातावरण और बर्फीली हवा जैसी कठोर जलवायु परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी जान की परवाह के बिना बहादुर ऑपरेटर ने बड़े उत्साह और दृढ़ता के साथ काम करना जारी रखा था कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा और अपने काम पर अनुकरणीय गर्व का प्रदर्शन किया ।ऑपरेशन के दौरान वह डोजर के साथ हिमस्खलन में दब गए । अजमेर अली ने भारी बाधाओं और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सराहनीय दृढ़ता और असाधारण साहस का प्रदर्शन किया जिसके लिए राष्ट्रपति ने 22 मार्च 1987 को शहीद अजमेर अली को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया था । याची शहीद की पत्नी के पास खेती के लिए भूमि न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की । याची की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नीरज तिवारी व न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की बेंच में बहस में बताया कि शासन व नगर निगम की नीतियों के अनुसार अबरीशा ने 25 बीघा जमीन आवंटित किए जाने की मांग केंद्र सरकार व राज्य सरकार से की थी ।जिला सैनिक कल्याण व पुर्नवास अधिकारी मेरठ ने याची की मांग को जायज मानते हुए नगर आयुक्त मेरठ को जमीन आवंटित करने हेतु प्रचलित नियमावली के अंतर्गत जमीन आवंटित करने हेतु पत्र भेजा था लेकिन याची को कोई जमीन आवंटित नही हुई ।याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी को सुनकर हाईकोर्ट ने उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 129(5)(B) के अंतर्गत याची की मांग पर नियमानुसार नगर आयुक्त को 6 सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश पारित किया।
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