राज्यसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव ने धनराज नथवानी को उतारने और तीसरे उम्मीदवार के दांव से भाजपा के लिए 8वीं सीट के लिए खड़ी की चुनौती
नई दिल्ली। अखिलेश यादव ने प्रो. राम गोपाल यादव के साथ धनराज नथवानी का नामांकन दाखिल कराकर न सिर्फ कॉरपोरेट जगत के समीकरणों का इस्तेमाल किया है, बल्कि भाजपा को अपने ही सहयोगी खेमे के पारिवारिक जुड़ाव के सामने ला खड़ा किया है, जिससे इस चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प और भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो गया है। उत्तर प्रदेश में 16 अक्टूबर 2026 को होने वाले राज्यसभा चुनाव में अखिलेश यादव द्वारा धनराज नथवानी को उतारने और तीसरे उम्मीदवार के दांव से भाजपा के लिए 8वीं सीट को सुरक्षित करना बड़ी चुनौती बन गया है। दावा है कि अखिलेश यादव के इस कदम से क्रॉस वोटिंग की आशंका और भाजपा को होने वाले संभावित नुकसान की स्थिति से इंकार नहीं किया जा रहा है।
राज्यसभा के लिए चार वोटों का बाहर से करना होगा इंतजाम
यूपी में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए लगभग 37 प्रथम वरीयता वोटों की आवश्यकता है। भाजपा (255 विधायक) और उसके सहयोगी दलों (अपना दल, RLD, SBSP, निषाद पार्टी) को मिलाकर एनडीए के पास 7 सीटें आसानी से जीतने के बाद लगभग 33 अतिरिक्त वोट बचते हैं। मसलन ये है कि 8वीं सीट जीतने के लिए भाजपा को कम से कम 4 और बाहरी वोटों की जरूरत है। राजा भैया की पार्टी (जनसत्ता दल लोकतांत्रिक) के 2 विधायक हैं। अगर वे भाजपा के साथ आते हैं, तब भी 2 वोटों की कमी रह जाती है। ऐसे में धनराज नथवानी जैसे रसूखदार उम्मीदवार के आने से भाजपा के लिए अपने सहयोगियों और निर्दलीय विधायकों को एकजुट रखना मुश्किल हो रहा है।
एनडीए में सेंधमारी तय-नथवानी का कॉरपोरेट रसूख
समाजवादी पार्टी एनडीए गठबंधन के असंतुष्ट विधायकों और छोटे दलों के संपर्क में है और उन्हें आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में टिकट का आश्वासन देकर साधने का प्रयास कर रही है। समाजवादी पार्टी एनडीए गठबंधन के असंतुष्ट विधायकों और छोटे दलों के संपर्क में है और उन्हें आगामी 2027 विधानसभा चुनाव में टिकट का आश्वासन देकर साधने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा धनराज नथवानी के कॉर्पोरेट बैकग्राउंड और उनके पिता के एनडीए के साथ पुराने संबंधों के कारण, सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों का उनके प्रति नरम रुख होने की आशंका है, जिससे गुप्त रूप से पाला बदलने का खतरा बढ़ गया है।
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