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ट्रंप के लिए फर्स्ट मोदी बनाम शी जिनपिंग

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद एयरपोर्ट (ज्वाइंट बेस एंड्रयूज) जाकर उनका स्वागत किया

नई दिल्ली। हाल ही में (सितंबर 2026) चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की वाशिंगटन यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोटोकॉल तोड़कर खुद एयरपोर्ट (ज्वाइंट बेस एंड्रयूज) जाकर उनका स्वागत किया, जिसमें फाइटर जेट्स का फ्लाईओवर और लंबा रेड कारपेट शामिल था। इस तरह के असाधारण स्वागत के पीछे तमाम वजह और चीन से डर तक की बात कही जा रही है। इसके इतर यह सवाल भी उठ रहा है कि दुनिया के सबसे बड़े और लोकतांत्रिक देश भारत के पीएम मोदी जब यूएस सरकारी दौरे पर जाते हैं तो शी जिनपिंग सरीखा वॉर्म वैल्कम ना होना खटकता है, शी जिनपिंग का स्वागत एयरपोर्ट पर खुद डोनाल्ड ट्रंप करने के लिए दौड़े चले आते हैं। नौबत केवल वेकलम तक नहीं है, ट्रंप भारत और पीएम मोदी को लेकर कई बार मर्यादा लांघ चुके हैं और अनाप-शनाप बोल चुके हैं। ट्रंप का व्यवहार और उनकी भाषा कई बार मर्यादित नहीं होती और वे भारत को लेकर ऐसी बातें बोल जाते हैं जो निश्चित रूप से बुरी लगती हैं।उनकी दोस्ती में एक गहरा विरोधाभास और स्वार्थ छिपा है, जिसे भारत की जनता और विदेश मंत्रालय दोनों बहुत अच्छी तरह समझते हैं। एक भारतीय के तौर पर जब हम अपने देश या हमारे लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रधानमंत्री के लिए किसी विदेशी नेता के मुंह से अपमानजनक या दोहरे मापदंड वाले शब्द सुनते हैं, तो ठेस लगना बिल्कुल स्वाभाविक है। ट्रंप के अच्छे शब्दों की आड़ में उन कड़वे और अनुचित अपशब्दों को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ वैसी अभद्र या अपमानजनक टिप्पणियां (जैसे भारत के संदर्भ में ‘Hellhole’ शेयर करना) नहीं की हैं, जैसी वे कभी-कभी भारत या अन्य लोकतांत्रिक देशों के नेताओं को लेकर कर देते हैं। इतना ही नहीं डोनाल्ड ट्रंप तानाशाही या कम्युनिस्ट व्यवस्था वाले नेताओं (जैसे शी जिनपिंग या उत्तर कोरिया के किम जोंग उन) के सामने बेहद सलीके से बात करते हैं, क्योंकि उन व्यवस्थाओं में जरा सी बात बिगड़ने पर बातचीत के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं।

ट्रंप की वो आपत्तिजनक टिप्पणियां

भारत को ‘गंदा’ (Filthy) कहना: ट्रंप ने एक राष्ट्रपति बहस (Presidential Debate) के दौरान पर्यावरण और हवा की गुणवत्ता पर बोलते हुए भारत को ‘Filthy’ (गंदा) कहा था।
अप्रैल 2026 में ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक दक्षिणपंथी पॉडकास्ट होस्ट (माइकल सैवेज) का एक ट्रांसक्रिप्ट शेयर किया था, जिसमें बर्थराइट सिटीजनशिप (अमेरिका में जन्म लेते ही नागरिकता मिलने के नियम) की आलोचना करते हुए भारत और चीन जैसे देशों के लिए ‘Hellhole’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप कई बार बंद कमरों में पीएम मोदी के बात करने के लहजे (Accent) की नकल उतार चुके हैं और भारत की व्यापार नीतियों को लेकर बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं। “भारत अमेरिकी नौकरियों को खा रहा है और हम पर भारी टैक्स लगा रहा है, मैं उन्हें ठीक कर दूंगा।”

डेमेज कंट्रोल

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मिलने वाली तवज्जो एक “खतरनाक प्रतिद्वंद्वी के साथ तनाव कम करने” की मजबूरी जैसी है, जबकि पीएम मोदी और भारत को मिलने वाली तवज्जो एक “भरोसेमंद मित्र और भविष्य के वैश्विक साझेदार” के रूप में है। इसलिए, केवल स्वागत के कैमरों और रेड कारपेट की लंबाई से यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि अमेरिका चीन को ज्यादा महत्व देता है।

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