Home Delhi अखिलेश ने दी थीं 33 इस बार जयंत को 35 की दरकार
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अखिलेश ने दी थीं 33 इस बार जयंत को 35 की दरकार

अखिलेश ने दी थीं 33 इस बार जयंत को 35 की दरकार

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अखिलेश ने दी थीं 33 इस बार जयंत को 35 की दरकार
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बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा, और अलीगढ़ तक भाजपा रखेगी जयंत को सीमित

नई दिल्ली। साल वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने रालोद को 33 सीटें दी थीं, जिसमें उसे उसने 8 सीटें जीती थीं और बाद में एक उपचुनाव भी जीता था। वर्तमान में उसके पास 9 विधायक हैं, लेकिन इस बार जयंत चौधरी जो केंद्र सरकार का हिस्सा हैं उन्हें भाजपा से 35 सीटों की दरकार है। करीबी सूत्रों की मानें तो जयंत चौधरी इस बार अपनी मौजूदा 9 सीटों के अलावा लगभग 20 से 25 अन्य सीटों पर दावा ठोक रहे हैं। रालोद की रणनीति केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपने पारंपरिक गढ़ तक सीमित न रहकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड (जैसे बस्ती और आस-पास के जिले) में भी कुछ सीटें हासिल करने की है, ताकि पार्टी का पूरे सूबे में विस्तार हो सके। भाजपा और रालोद के बीच 15 से 18 सीटों पर अंतिम सहमति बन सकती है, जिसमें से अधिकांश सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश (बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बुलंदशहर, मथुरा, और अलीगढ़ के कुछ हिस्से) की होंगी।

75 से 80 सीटें

भाजपा की बात करें तो जानकारों का कहना है कि यूपी चुनाव में पार्टी नेतृत्व सहयोगियों को 75 से 80 सीटों पर निपटाने के मूड में है। भाजपा यूपी की कुल 403 सीटों में से अपने सहयोगियों (RLD, अपना दल-एस, सुभासपा, निषाद पार्टी) को 75 से 80 सीटें देने का मन बना रही है। ऐसे में भाजपा के लिए अकेले रालोद को 35 सीटें देना काफी मुश्किल हो सकता है, क्योंकि अन्य सहयोगी दल भी बड़ी हिस्सेदारी मांग रहे हैं। वहीं दूसरी ओर रालोद की इस दावेदारी के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा था कि भाजपा को रालोद के कद को देखते हुए कम से कम 66 से 86 सीटें देनी चाहिए, क्योंकि उन्होंने खुद 2022 में उन्हें 33 सीटें दी थीं।

जयंत को मुश्किल से 18 सीटें

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के लिए भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन में सीटों के बंटवारे का जो खाका तैयार हो रहा है, उसके अनुसार भाजपा रालोद (RLD) को 15 से 18 सीटें दे सकती है। हालांकि रालोद की ओर से लगभग 35 सीटों की शुरुआती दावेदारी की गई है, लेकिन गठबंधन के आंतरिक समीकरणों को देखते हुए वास्तविक समझौता इसी दायरे के आसपास होने की संभावना है। भाजपा की रणनीति है कि 2022 में जीती हुई अपनी मजबूत सीटों (करीब 255-258 सीटें) को वह अपने ही पास सुरक्षित रखे। वह सहयोगियों को केवल वे सीटें सौंपना चाहती है जहां सामाजिक समीकरण कठिन हैं या जहां सहयोगी दल भाजपा से बेहतर स्थिति में हैं। वर्तमान में रालोद के पास 9 विधायक हैं। भाजपा का मानना है कि रालोद को उसकी मौजूदा 9 सीटों के अलावा पश्चिमी यूपी में कुछ ऐसी सीटें दी जाएं जहां जाट और किसान बाहुल्य होने के कारण रालोद की ‘विनेबिलिटी’ (जीतने की क्षमता) भाजपा से अधिक हो।

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