कई राज्यों में ज्ञानेश के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे
कई राज्यों में ज्ञानेश के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे
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पीएम मोदी व गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच रही है इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे की तपिश, ज्ञानेश बोले सामान्य बात
नई दिल्ली। दा इंडियन एक्सस प्रेस के खुलासे के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ देश भर में नाराजगी का माहौल है। इंडियन एक्सप्रेस की जर्नलिस्ट रितिका चोपड़ा ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कई फ़ैसलों पर आपत्ति दर्ज की। कई राज्यों में ज्ञानेश के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए हैं। केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे कई राज्यों में कर्मचारी संगठनों ने उनके खिलाफ सड़क पर उतरकर प्रदर्शन, नारेबाजी और पुतला दहन किया है, जिससे कई जगह कामकाज भी प्रभावित हुआ है। ज्ञानेश कुमार सफाई भी दे रहे हैं कि SIR समेत सभी अंतिम फैसले तीनों आयुक्तों की आपसी सहमति से ही लिए गए थे और लोकतांत्रिक संस्थाओं के भीतर किसी विषय पर अलग-अलग राय होना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ज्ञानेश को सरकारी गवाह बनने की सलाह देते हुए उनका इस्तीफा मांग लिया है। ज्ञानेश कुमार के हालिया प्रशासनिक रुख और फैसलों के कारण कर्मचारी संगठनों में भारी नाराजगी है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज किया है। भाजपा का कहना है कि वोटर लिस्ट का संशोधन एक कानूनी प्रक्रिया है जो फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए की गई थी। वहीं, चुनाव आयोग ने भी सफाई दी है कि आयोग के भीतर मतभेद होना सामान्य लोकतांत्रिक और प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
पीएम मोदी तक आंच
इस पूरे प्रकरण की आंच अब पीएम मोदी व गृहमंत्री अमित शाह तक पहुंच रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह “वोट चोरी” की इस पूरी कथित साजिश के शीर्ष पर हैं और इस मामले में दोनों की जांच होनी चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर मोदी सरकार पर चौतरफा राजनीतिक और नैतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने सरकार के इशारे पर चुनावी प्रक्रियाओं में हेरफेर किया, जिसके बाद सरकार को कई मोर्चों पर घेरा जा रहा है।
अमित शाह को हटाने की मांग
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग गृह मंत्रालय के इशारे पर काम कर रहा है, इसलिए पीएम मोदी को लोकतंत्र बचाने के लिए अमित शाह को पद से हटा देना चाहिए। राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि ज्ञानेश कुमार को “सरकारी गवाह” (Approver) बन जाना चाहिए और यह बताना चाहिए कि उन्हें ऐसा करने के लिए किसने कहा था। विपक्ष का यह बयान सीधे तौर पर मोदी सरकार के शीर्ष नेतृत्व को असहज करने और दबाव में लाने की रणनीति है। विपक्ष का आरोप है कि मोदी सरकार ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के आदेश को दरकिनार करते हुए ज्ञानेश कुमार को इस पद पर बैठाया ताकि चुनाव आयोग को एक “पॉलिटिकल टूल” (राजनीतिक हथियार) के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
दुनिया में इमेज पर असर
राजनीतिक विश्लेषकों (जैसे संदीप घोष) के अनुसार, यदि मुख्य चुनाव आयुक्त इन सवालों का जवाब नहीं देते हैं, तो वह सरकार के लिए एक बड़ी “लायबिलिटी” (बोझ) बन जाएंगे, क्योंकि इससे देश की लोकतांत्रिक छवि और चुनावों की विश्वसनीयता पूरी तरह प्रभावित हो रही है। विपक्ष दोनों सदनों में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस दे रहा है, जिससे संसद के आगामी सत्र में सरकार को भारी गतिरोध का सामना करना पड़ सकता है।
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