ई 20 के साथ-साथ ई 10 का विकल्प ला सकती है सरकार, पुराने वाहानों को रहे भारी नुकसान को लेकर मोदी सरकार गंभीर
नई दिल्ली। पुरानी गाड़ियों को एथनाल वाले तेल से हो रहे भारी नुकसान के बाद सरकार ई 20 पर बैकफुट पर आ सकती है। इसके पीछे हालांकि बड़ी वजह आने वाले यूपी समेत कई राज्यों के विधानसभा और उसके बाद साल 2029 में लोकसभा चुनाव में लोगों की नाराजगी को देखते हुए मोदी सरकार और उसके रणनीतिकार बैकफुट पर आने को मजबूर हुए हैं। बताया जा रहा है कि , लेकिन पुराने वाहनों की सुरक्षा और जनता के विरोध को देखते हुए E10 पेट्रोल को फिर से विकल्प के तौर पर लाने पर शुरुआती विचार-विमर्श शुरू हो गया है। यदि ऐसा हो जाता है कि यह पुराने वाहन चलाने वालों के लिए वाकई अच्छी खबर होगी।
पुराने वाहनों को भारी समस्या
यह बिल्कुल सच है कि अप्रैल 2023 से पहले बनी गाड़िया खासतौर से BS III & BS IV को ई 20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गंभीर तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एथनॉल तेल के ब्रांड एम्बेसेडर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी भले ही कुछ भी कहें लेकिन ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों, मैकेनिक्स और सरकारी रिपोर्टों में भी इन समस्याओं की पुष्टि हुई है।
सरकार को चेतावनी
मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने पुराने दोपहिया वाहनों को बचाने के लिए E20 के साथ E10 पेट्रोल भी उपलब्ध कराने की वकालत की है। साथ ही उन्होंने सरकार को इससे हो रहे नुकसानों को लेकर भी सख्त लहजे में चेतावनी और सलाह दी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले E20 को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया था और कहा था कि इसे हटाने का कोई प्लान नहीं है, लेकिन अब आर्थिक सलाहकार वी अनंदत नागेश्वरन की सलाह के बाद सरकार रोलबैक पर विचार कर रही है।
तेल कंपनियों से वार्ता
इस मुद्दे पर अब सरकार और तेल कंपनियां इस बात पर शुरुआती बातचीत कर रही हैं कि क्या पुराने वाहनों के लिए E10 को दोबारा बाजार में लाया जा सकता है। E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों के माइलेज में कमी और इंजन के रबर पार्ट्स गलने जैसी चिंताएं सामने आई हैं।
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