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जेसीबी नहीं पहुंची तो लोगों ने ली राहत की सांस

जेसीबी नहीं पहुंची तो लोगों ने ली राहत की सांस

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जेसीबी नहीं पहुंची तो लोगों ने ली राहत की सांस
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मेरठ। शास्त्रीनगर में चौथे दिन आवास विकास की जेसीबी नहीं पहुंची तो लोगों ने राहत की सांस ली। दरअसल हुआ यह कि आवास विकास के अधिकारियों ने आज भी उन मकानों में तोड़फोड़ की तैयारी की हुई थी जिनको नोटिस भेजे गए हैं। तीन दिन से आवास विकास की जेसीबी नोटिस वाले मकानों पर कहर बनकर टूट रही हैं। बड़े पैमाने पर मकानों में तोड़फोड़ अब तक की जा चुकी है। आज भी इसकी तैयारी थी, लेकिन जानकारी मिली है कि आज पुलिस फोर्स नहीं मिल सकी। पुलिस फोर्स का ना मिलना उनके लिए राहत भरा साबित हुआ जिनके मकानों में आज तोड़फोड़ के लिए आवास विकास की जेसीबी तैयार थीं। जो करना चाहिए वो करने के बजाए हो उलटा रहा है। ऐसा नहीं है कि शास्त्रीनगर में आवास विकास की योजनाओं में आवासीय भवनों को कामर्शियल में कन्वर्ट नहीं किया जा रहा है। यह काम अभी भी चल रहा है, लोगों का कहना है कि बजाए पुरानों को ध्वस्त करने के अच्छा तो यह होता कि जो नए बन रहे हैं उनका रोका जाता, लेकिन जब जिन्हें रोकना है वो ही बनवाने पर उतारू हो जाए तो फिर रोकेगा कौन। जो अफसर अब हैं उनके जाने के बाद जो अफसर आएंगे तो अब बन रहे भवनों को तुड़वाने का काम करेंगे। और यह सिलसिल यूं ही चलता रहेगा। सजा केवल पब्लिक को मिल रही है उन अफसरों को नहीं जो इस सारे फसाद की जड़ हैं।

नेता बुला रहे हैं पब्लिक को

अपने मकानों को बचाने के लिए शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट के लोग जितनी गुहार लगा सकता थे उससे ज्यादा लगा चुके हैं। सीएम, मंत्री, सांसद, विधायक, व्यापार संघ नेता, विपक्ष के नेता जितनी उनकी कूवत है उतना उन्होंने अपने आशियानों को बचाने के किया। एक स्थिति ऐसी भी आ गयी कि नेताओं ने पूरी तरह से लोगों से किनारा कर लिया। कोई आकर झांकने तक को तैयार नहीं था। पुलिस ने धरना उठवा दिया, महिलाओं का टैंट उखड़वा दिया। उसके बाद भी कोई नेता झांकने नहीं आया। अब जो सुनने में आया है वो यह कि कुछ बड़े सत्ताधारी नेता शास्त्रीनगर के लोगों को जिनके मकानों पर आफत का साया मंडरा रहा है उन्हें बुला रहे हैं, हालांकि यह भी सच है कि जो बुला रहे हैं उनके पास मकानों को बचाने के लिए कोई तरीब नहीं है। इसके पीछे विशुद्ध रूप से राजनीति चमकाने के अलावा कोई दूसरी वजह नजर नहीं आ रही है।
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