नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट के हालात बेदह नाजुक हैं। जंग की चपेट मे आए मुल्कों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वीजिंग विजिट और स्ट्रेट होर्मूज पर ईरानी मिसाइलों के पहरे के बीच पाकिस्तान की मार्फत दोनों देशों के बीच बातचीत की कोशिशों के बीच ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका भरोसे लायक नहीं। भारत में आयोजित ब्रिक सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अपने देश लौटते वक्त मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कहा है कि जो कुछ अमेरिका कहता है उस पर अमल करता नहीं दिखता। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उन्हें बातचीत में अमेरिका की “गंभीरता” पर संदेह है, और उन्होंने पुष्टि की कि ईरान ने समृद्ध यूरेनियम को स्थानांतरित करने के रूस के प्रस्ताव पर उससे बात की थी।
मिडिल ईस्ट में विनाश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अपने समकक्ष राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान युद्ध ने मध्य पूर्व में “विनाश” पैदा कर दिया है।हालांकि इसके लिए ईरान को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। भारत, चीन और रूस सरीखे दुनिया के तमाम देश चाहते हैं कि मिडिल ईस्ट में शांति की स्थापना हो, लेकिन जिस तरह से स्ट्रेट होर्मूज को लेकर हालात बने हुए हैं और जंग खत्म करने के लिए आए दिन नई-नई चीजें सामने आयी जा रही हैं उससे नहीं लगता कि दुनिया को अच्छी खबर मिलेगी।
हालात नाजुक भारी नुकसान
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद के स्टेटस की यदि बात करें तो इसमें कोई दो राय नहीं कि ईरान ने जान ओ माल का काफी नुकसान उठाया है लेकिन यह भी सही है कि उसने के सबसे करीबी इजरायल और खाड़ी में उसके दूसरे मित्र देशों पर भारी बमबारी की है। ईरान ने साबित कर दिया कि वह ईट का जवाब पत्थर से देने की कूबत रखता है। ईरानी मिसाइलों के हमले से परेशान फिलहाल इजरायल ने ईरान पर हमले पूरी तरह से रोक दिए हैं, लेकिन लेबनान पर इजरायली हमले जारी है। जंग खत्म करने की ईरान की शर्तों में मुख्य शर्त लेबनान पर इजरायली हमलों पर रोक लगाया जाना है जो अभी लगनी बाकि है।
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