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महताब से खदेड़े जाएंगे कबाड़ी व मीट कारोबारी

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महताब से खदेड़े जाएंगे कबाड़ी व मीट कारोबारी
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पहले भी कराया जा चुका है इलाका खाली, हो गया था बवाल, अवैध रूप से हैं काविज भारत सरकार की भूमि पर

मेरठ/यदि सब कुछ पहले से तय प्लानिंग के मुताबिक हुआ तो महताब के आसपास भारत सरकार की भूमि पर अवैध रूप से काविज लोगों खासतौर से कबाड़ियों को हटाकर इस इलाके को अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाएगा। यह कोई पहली बार नहीं किया जाएगा। इससे पहले भी पांच मार्च साल 2019 को कैंट बोर्ड और सेना की संयुक्त कार्रवाई में इस पूरे इलाके को खाली कराया जा चुका है। भारत सरकार की करोड़ों कीमत की जगह को अवैध कब्जों से मुक्त करा लिया गया था। महताब सिनेमा के सामने जहां वर्तमान में नॉनवैज की अवैध दुकानें आबाद हैं, ये दुकानें पहले भी इस स्थान पर आबाद थीं, यानि साल 2019 से पहले। कैंट बोर्ड और सेना ने व्यापक कार्रवाई कर उन्हें हटवा दिया था, लेकिन वक्त के साथ इस जमीन पर दोबारा कब्जा होता चला गया। अब वहां पूरा मार्केट आबाद है। केवल मार्केट ही आबाद नहीं है, शाम के वक्त खासतौर से इन खास दिनों में तो वहां से पैदल गुजरना भी दुश्वार होता है। यहां की दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मुसलमानों के अलावा अन्य लोग यहां से होकर गुजरने की हिमाकत नहीं कर पाते हैं। हालांकि ऐसा भी नहीं है कि कोई उन्हें रोकता हो या मना करता हो, वहां की स्थिति को देखते हुए उधर से गुजरने की अब हिम्मत नहीं कर पाते। भूसा मंड़ी से वाया मछेरान और महताब दिल्ली रोड पर भारत सरकार की बेशकीमती जमीन पर नॉनवैज की पूरी मार्केट अवैध है। शाम होते ही यह मार्केट गुलजार होने लगती है और इन दिनों तो रात भर यह गुलजार रहती है। सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनायी कुछ दुकानें तो इनमें ऐसी हैं कि तड़के चार बजे तक जब तक सहरी होती है गुलजार रहती हैं। अगले दिन फिर शाम को पांच बजे से ये खुलनी शुरू हो जाती हैं।
यह चाहते हैं कैंट विधायक
जिस इलाके का यहा जिक्र किया जा रहा है वह कैंट विधानसभा क्षेत्र में आता है। कैंट विधायक अमित अग्रवाल यहां की स्थिति से अंजान नहीं। उन्होंनें बताया कि साल 2019 की तर्ज पर एक बार फिर से कैंट की टीमों का संयुक्त आपरेशन चलाया जाए। उसमें पुलिस प्रशासन की मदद भी ली जा सकती है।
यह है प्लान
कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने इस सबंध में जो जानकारी दी उसके अनुसार दिल्ली/गाजियाबाद/नोएडा यानि दिल्ली रोड से वाया रोहटा रोड होकर मेरठ में प्रवेश करने वाली तमाम बसें जो अब वेस्ट एंड रोड जीटीवी के सामने होकर दिल्ली रोड पहुंचती हैं वो सीधे रोहटा रोड से मछेरान भूसा मंड़ी होते हुए दिल्ली रोड और वहां से भैंसाली बस स्टैंड पहुंच जाएं। दरअसल इन बसों के वेस्ट एंड रोड पहुंचने से स्कूल बच्चों को हादसों का शिकार होने का खतरा रहता है। इसलिए प्ला यह है कि ये बसें सीधे रोहटा रोड से वाया कैंट होते हुए भूसा मंड़ी चौकी से मछेरान होकर दिल्ली रोड पहुंचें। इस प्लान को लागू करने के लिए जरूरी है कि इस इलाके में सरकार की जमीन पर अवैध रूप से काविज लोगों को हटाया जाए। इन्हें हटाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जाना जरूरी है। जहां तक अभियान की बात है तो कैंट बोर्ड के स्तर से कभी कोताही नहीं बरती जाती। लेकिन जिस अभियान की बात की जा रही है उसके लिए पुलिस प्रशासयन का सहयोग भी जरूरी है। पुलिस प्रशासन के बिना यहां अभियान की कल्पना भी नहीं की जा सकती।
पहले हो चुका है बवाल
5 मार्च 2019 की शाम का वक्त था जब भूसा मंड़ी में सरकारी जमीन से अवैध कब्जे हटाने गयी कैंट बोर्ड के दस्ते को घेर लिया गया था। अतिक्रमण हटाने को लेकर एक समुदाय के लोग भड़क गए। उग्र भीड़ ने पुलिस को पीटा और दिल्ली रोड पर पथराव कर अराजकता फैला दी। आगजनी हुई जिसमें भूसा मंडी क्षेत्र की करीब 200  झुग्गी झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। धमाके के साथ कई सिलिंडर फटने से आग और भयावह हो गई। आग की चपेट में आकर धार्मिक स्थल भी जल गया। भीड़ ने दिल्ली रोड पर रोडवेज बसों और निजी वाहनों में तोड़फोड़ व जमकर लूटपाट की। गनीमत रही कि आम लोगों के संयम से शहर दंगे की आग में जलने से बच गया। दरअसल में फोर्स भूसा मंडी में इकराम का अवैध रूप से बनाया गया मकान तोड़ने गई थी। कार्रवाई हो चुकी थी। इसी दौरान एक दर्जन महिलाओं ने पुलिस व कैंट बोर्ड की टीम का विरोध किया। हंगामा करते कैंट बोर्ड की टीम से मारपीट करते पथराव कर दिया। उस वक्त कैंट बोर्ड के सीईओ प्रसाद चव्हाण थे। कैंट बोर्ड के सीईओ प्रसाद चव्हाण की तरफ से नदीम, समर, मुमताज, रहीसुद्दीन निवासी मछेरान समेत 250 लोगों के खिलाफ थाना सदर पर केस दर्ज कराया है। सात लोगों को हिरासत में लिया गया। बताया गया कि हमले में कैंट बोर्ड तत्कालीन सुपरवाइजर राजकुमार, मोहन, हीरालाल, एसओ सदर बाजार विजय गुप्ता समेत कई लोगों को चोटें आईं थीं। वैसे हालात फिर से ना पैदा हो इसलिए इस बार तमाम नफा नुकसान तय करने के बाद ही कैंट बोर्ड के सीईओ जाकिर हुसैन कार्रवाई की बात कह रहे हैं। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी को भी सरकारी जमीन पर कब्जे की अनुमति नहीं दी जाएगी। कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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