तामिलनाडू के मुख्यमंत्री विजय थलपति के रवैये पर कांग्रेस समेत इंडिया गठबंधन के तमाम दलों ने चढ़ाई आस्तीन
नई दिल्ली। कुछ रोज पहले अमित शाह को धमकाते हुए मुझे उद्धव ठाकरे मत समझना कहने वाले तामिलनाडू के सीएम थलपति विजय अब शाह के सामने सरेंडर की मुद्रा में हैं। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah से मुलाकात के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय द्वारा परिसीमन बिल पर अपना रुख बदलने और लोकसभा में राज्यों की हिस्सेदारी सुरक्षित रखने की मांग करने को राजनीतिक गलियारों में ‘सरेंडर’ के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि पहले वे इस बिल का कड़ा विरोध कर रहे थे।परिसीमन बिल के धुर विरोधी समझे जाने वाले तामिलनाडू के सीएम थलपति विजय अब गृहमंत्री अमित शाह के सामने सरेंडर की मुद्रा में हैं। गृहमंत्री शाह से मुलाकात के बाद एकाएक थलपति के सुर बदल गए हैं। हालांकि उनके बदले हुए सुर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के दूसरे घटक दलों को नहीं सुहा रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अमित शाह से मुलाकात के बाद परिसीमन पर थलपति विजय ने अपना स्टैंड बदल दिया है। परिसीमन का विरोध करने वाले विजय ने अब लोकसभा में राज्यों के मौजूदा प्रतिनिधित्व की हिस्सेदारी सुरक्षित रखने की मांग की है।
संख्या स्थिर रखने की मांग से पीछे हटे
बता दें कि पहले विजय मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या को स्थिर रखने की मांग कर रहे थे। लेकिन अब उन्होंने केंद्र सरकार से राज्यों की संसद में मौजूदा हिस्सेदारी कम नहीं करने की स्पष्ट कानूनी गारंटी देने का आग्रह किया है। गुरुवार को मल्लापुरम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में केंद्र से स्पष्ट कानूनी आश्वासन देने की मांग की कि जनसंख्या के आधार पर होने वाले परिसीमन के बाद किसी राज्य के संसद में प्रतिनिधित्व का प्रतिशत कम नहीं होगा।
ये है विजय थलपति के सरेंडर की वजह
विजय का यह रुख 12 अगस्त को तमिलनाडु विधानसभा में पारित परिसीमन विरोधी प्रस्ताव से अलग माना जा रहा है। विजय ने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों के आवंटन पर लगी रोक समाप्त होने और परिसीमन विधेयक 2026 पर चर्चा के बीच दक्षिणी राज्यों में चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से संसद में दक्षिणी राज्यों की मौजूदा आवाज कमजोर हो सकती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण, मानव विकास और आर्थिक प्रगति के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसलिए इन उपलब्धियों के कारण उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे संविधान में निहित संघीय संतुलन और समानता के सिद्धांत से भी जोड़ते हुए केंद्र से कानूनी सुरक्षा की मांग की।
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