मेरठ। भाजपा पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष नवाब सिंह गुर्जर को बनाया गया है। हालांकि इस प्रतिष्ठा पूर्ण पद के लिए मोहित बेनिवाल व अंकुर राणा को भी दावेदार मना जा रहा था, लेकिन नेतृत्व ने उन पर भरोसा ना कर नवाब सिंह गुर्जर को तरजीह दी है। मोहित बेनिवाल पूर्व मे यह दायित्व संभाल चुके हैं। नवाब सिंह के नाम के एलान के बाद यह साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश के साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने इस बार गुर्जरों को पहली पसंद बनाने का फैसला किया है। डा. सोमेन्द्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाकर उनका कद बढ़ने के बाद अब दो बार के विधायक नवाब सिंह नागर को पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष बना गया है। हालांकि यह समय बताएंगा कि समाजवादी पार्टी के गुर्जर कार्ड की काट के लिए भाजपा का यह दाव कितना कारगर साबित होगा।
सूत्रों की माने तो नेतृत्व को जाट या गुर्जर में चुनाव करना था हालांकि इस बार क्षेत्रीय अध्यक्ष पद के लिए कई वैश्य नेता भी ताल ठोक रहे थे, लेकिन नेतृत्व ने नवाब सिंह के नाम का एलान कर साफ कर दिया कि गुर्जरों ही विधानसभा चुनाव में वेस्ट में खेवनहार बनेंगे। सूत्रों की मानें तो जाट में पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष और प्रदेश उपाध्यक्ष मोहित बेनिवाल, अंकुर राणा का नाम प्रबलता से था। हापुड़ के विकास अग्रवाल वैश्य कोटे से इस रेस में आगे चल रहे थे। भाजपा ने गुर्जर क्षेत्रीय अध्यक्ष बनाकर बड़ा संदेश दिया है। अब पार्टी का फोकस गुर्जरों पर है। हाल में मंत्रीमंडल विस्तार में भी मेरठ से राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर को प्रमोट किया गया है। उन्हें स्वतंत्र प्रभार का जिम्मा दिया गया है। केंद्र में कृष्णपाल गुर्जर बिरादरी का प्रतिनिधित्व करने वाला बड़ा चेहरा हैं। इसके साथ अब क्षेत्रीय अध्यक्ष भी गुर्जर बनाकर भाजपा ने आगामी चुनाव को देखते हुए जातीय समीकरण साधा है।
नवाब सिंह नागर केवल दो बार के विधायक ही नहीं है उन्हें संगठन का भी अच्छा खासा तर्जुबा है। वर्तमान में वह प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। गौतम बुद्ध नगर (दादरी) के मूल निवासी, नागर उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रह चुके हैं और 1996 से 2007 तक दादरी से दो बार विधायक के रूप में कार्य कर चुके हैं। गौतमबुद्धनगर दादरी से दो बार विधायक (1996-2007) और उत्तर प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे हैं। 1980 में भाजपा के गठन के समय नोएडा के प्रथम मंडल अध्यक्ष का दायित्व निभाया। मात्र 21-22 वर्ष की उम्र में मंडल अध्यक्ष बनने वाले नागर लंबे समय से उत्तर प्रदेश, विशेषकर पश्चिमी यूपी और नोएडा में पार्टी संगठन को मजबूत करने में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने 1996 और 2002 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में दादरी से लगातार जीत हासिल की। वे लाल बहादुर शास्त्री गन्ना विकास बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। नबाव सिंह नागर के क्षेत्रीय अध्यक्ष बनने की घोषणा हो रही थी उधर नबाव सिंह नोएडा में निर्जला एकादशी पर जल भंडारा कर रहे थे। नोएडा सेक्टर-52 में निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर फ़ोनरवा द्वारा आयोजित शरबत वितरण कार्यक्रम में सम्मिलित होकर सेवा के इस पुनीत कार्य में सहभागिता की।
फैसले के पीछे सपा के साइट इफैक्ट
नवाब सिंह गुर्जर की ताजपोशी को संगठन में कुछ लोग समाजवादी पार्टी की माह मार्च में गौतमबुद्धनगर के दादरी में पीडीए के तहत बड़ी सामाजिक समरसता रैली का साइड इफैक्ट मानकर चल रहे हैं। वो रैली मूलरूप से गुर्जर सम्मेलन था। जिसका जिम्मा सपा के प्रवक्ता और गुर्जर नेता राजकुमार भाटी के ऊपर था। पूरे वेस्ट यूपी से लेकर आसपास के जिलों के गुर्जर नेता इस रैली में पहुंचे थे। गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा पर यहां अखिलेश यादव ने फूल चढ़ाए। उसी कॉलेज के प्रांगढ़ में ये रैली हुई थी। इस रैली में भारी संख्या में गुर्जर बिरादरी के लोग पहुंचे थे। जो एक तरह से बिरादरी का अपना शक्ति प्रदर्शन था। अगर वेस्ट यूपी में जीतना है तो गुर्जरों को जाटों से कम नहीं आंका जाए। इस रैली से सियासी गलियारों में बड़ा मैसेज गया कि गुर्जरों को नाराज नहीं किया जा सकता। उन्हें संभालना होगा। इसी का फायदा बिरादरी को मिला है। जब भाजपा ने गुर्जर चेहरे को क्षेत्रीय अध्यक्ष की कमान सौंपी। क्षेत्रीय अध्यक्ष बनने वाले नबाव सिंह नागर उसी दादरी से आते हैं जहां ये रैली हुई थी।
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