नई दिल्ली। यूएस और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद इस समझौते को अमली जामा पहनाने के लिए अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और ईरान की ओर से स्पीकर मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची के नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान और कतर की मौजदूगी में हो रही बातचीत में शामिल होने के लिए स्विटजरलैंड पहुंच गया है। ईरान का दावा है कि लेबनान पर हुए हमले के बाद स्ट्रेट होर्मूज को फिर से बंद कर दिया गया है, हालांकि यूएस का कहना है कि स्ट्रेट होर्मूज खुला हुआ है। जहाजों की आवाजाही जारी है। पाकिस्तान और कतर का कहना है कि आज हो रही बातचीत का मकसद जो समझौता हुआ है उसकी एक-एक बात को लागू करने के लिए दोनों का राजी करना है।
शांति समझौते के बावजूद उत्तरी लेबनान में इजराल की एयर स्ट्राइक लगातार जारी है। वहां भारी तबाही हुई है। लोगों के घर परिवार बर्बाद हो गए। तमाम बेगुनाह जिनमें बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं मारे गए हैं। लेबनान पर किए जा रहे हमलों से ईरान में जबरदस्त नाराजगी है। लोगों का मानना है कि इजराली हमलों की बड़ी कीमत अमेरिका को चुकानी पड़ सकती है। हालांकि अमेरिका नहीं चाहता कि लेबनान पर इजरायल हमले करे, लेकिन इजरायल अब ट्रंप कीकोई बात सुनने को राजी नहीं।
ईरान के उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने उम्मीद जताई है कि स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ता सफल होगी, और कहा है कि “हम एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं, एक ऐसा दौर जहां अरब क्षेत्र के किसी भी देश का बहिष्कार करना अब कोई विकल्प नहीं रहेगा और यह सवाल ही नहीं उठता।”आरिफ ने चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि “होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान का है, और हमारे पूर्वजों ने इतिहास में इस जलडमरूमध्य की रक्षा के लिए कई जानें कुर्बान की हैं, और इस जलडमरूमध्य को यूं ही पार नहीं किया जाना चाहिए”।
लड़ाई तो ईरान ने जीती अमेरिका हारा
इजरायलियों का मानना है कि जंग ईरान ने जीती और अमेरिका हार गया। अमेरिका के साथ हुए समझौते से ईरान और अधिक मजबूत होकर उभरा है। एक संस्था द्वारा 17 से 20 जून के बीच किए गए सर्वे में शामिल लोगों में से 92.1 प्रतिशत ने कहा कि ईरान को इस संघर्ष से अधिक लाभ हुआ है या उसने अधिक लाभ प्राप्त किया है, जबकि 82.9 प्रतिशत ने महसूस किया कि इजरायल की दीर्घकालिक सुरक्षा कमजोर हो गई है। 93.1 प्रतिशत का मानना था कि ईरान ने चुनाव जीत लिया है। इजरायल में अमेरिका-ईरान समझौते का व्यापक विरोध हुआ, जिसमें 63.2 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इसका विरोध किया, जबकि केवल 12.1 प्रतिशत ने इसका समर्थन किया।
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