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सैक्टर तीन व चार की महिलाओं का धरना जारी आरपार का एलान

सैक्टर तीन व चार की महिलाओं का धरना जारी आरपार का एलान

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सैक्टर तीन व चार की महिलाओं का धरना जारी आरपार का एलान
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मेरठ। आवास विकास परिषद के शास्त्रीनगर सैक्टर तीन व चार में मकानों पर लगाए गए सैटबैक के नोटिसों की मियाद बीते शुक्रवार को खत्म हो गयी है। नोटिसों की भाषा बता रही है कि अब आवास विकास परिषद किसी भी वक्त या सैटबैक के नाम पर तोड़फोड़ की कार्रवाई को अंजाम दे सकता है। इस बात से सैक्टर तीन व चार में रहने वाले भी अंजान नहीं, इसी के चलते उन्होंने धरना जारी रखने का एलान किया और आज शनिवार को भी बड़ी संख्या में महिलाएं गोल मंदिर चौराहे पर बनाए गए धरना स्थल पर पहुंचीं। कल यानि रविवार को बड़ा धरना और हंगामा हो सकता है। इसकी जानकारी एलआईयू की मार्फत अफसरों तक भी पहुंच गयी है। आशंका थी कि आज आवास विकास की ओर से सैटबैक को लेकर कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पूरे दिन इंतजार के बाद भी कोई पहुंचा नहीं।

सैक्टर तीन व चार की धरने पर बैठी महिलाओं ने बताया कि जब तक उनको दिए गए नोटिसों को आवास विकास वापस नहीं ले लेता और राहत का एलान नहीं किया जाता तब तक उनका धरना जारी रहेगा। महिलाओं ने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि सारा खेल ऊपरी कमाई है। यदि तमाम परिवार मिलकर पैसे जमा कर अफसरों की जेब भर दें तो चुप बैठ जाएंगे। उसके बाद ना उन्हें कोर्ट याद आएगा ना कानून याद रह जाएगा। उन्होंने कहा जो कुछ चल रहा है इसके लिए सिर्फ और सिर्फ अफसर ही कूसरवार हैं। कमाई के नाम पर मेरठ में अफसर आते हैं और मोटी कमाई करने के बाद लौट जाते हैं। जितनी भी मुसीबत आज शास्त्रीनगर वालों पर आ पड़ी है उसके लिए केवल भ्रष्ट अफसर जिम्मेदार हैं। आज से बीस तीस या चालिस साल पहले जब ये मकान बनाए जा रहे थे तब अफसरों ने क्यों नहीं रोका। उस वक्त अफसरों के दलाल बने कर्मचारी पैसे लेकर चले जाते थे और छूट दे दी थी चाहे जैसे बना लो। कार्रवाई सैटबैक पर नहीं बल्कि उन अफसरों पर होनी चाहिए जो यहां पूर्व में तैनात रहे हैं।

सैक्टर दो में अचानक धरना स्थगित

एक दिन पहले ऊर्जा राज्यमंत्री के आवास पर हंगामा करने के बाद किया गया था कि शास्त्रीनगर सैक्टर दो में जहां पहले से धरना चल रहा है, वहां महिलाएं धरना शुरू करेंगी। लेकिन बाद में आपस में राय मशवरा किय गया और तय किया कि तमाम महिलाएं अपने मकानों के पेपर लाएं। जो कानूनी लड़ाई लड़ी जा रही है उसके अनुसार तैयारी करें। सरकार की ओर से भी वकील दिया गया है।राज्यमंत्री की ओर से भी मदद की जा रही है। पहला काम कानूनी मोर्चे पर निपटने का है। यदि बात नहीं बनती तो फिर धरना प्रदर्शन हंगामे का विकल्प तो खुला हुआ है। उसके लिए तो कभी भी कहीं भी आ जा सकते हैं। लेकिन शुक्रवार को राज्यमंत्री के आवास पर हुए महिलाओं के हंगामे के बाद काफी चीजें बदली हैं। कानूनी मोर्चे पर अब ज्यादा सक्रियता दिखाई दे रही है।

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