नई दिल्ली। ईरान के कब्जे वाले स्ट्र्रेट हाेर्मूज को मुक्त कराने के लिए यूएस नेवी ने ईरान पर व्यापक हमला बोला है। आज रात वहां बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया गया है। इस सैन्य अभियान में ईरान को काफी नुकसान भी पहुंच रहा है। मिडिल ईस्ट से रिपोर्ट कर रही न्यूज ऐजेंसियों की मानें तो यूएस नेवी ने ईरान के द्वारा स्ट्रेट होर्मूज में तैनात की गयी मिसाइलों को काफी नुकसान पहुंचाया है। जिन शिप से स्ट्रेट हाेर्मूज तक फौजी सामान पहुंचाया जा रहा था, उनकाे भी जब्त कर लिया गया है। हर तरफ तबाही का मंजर नजर आ रहा है। कुछ घंटे पहले ही अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में तैनात यूएस नेवी को आर्मी ऑपरेशन शुरू करने का हुकूम जारी किया था। अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज संकट के चलते 15,000 सैनिकों के साथ बड़ा मिशन शुरू किया गया है।
ईरान ने भी अमेरिका को तगड़े जबाव की तैयारी कर ली है। उसकी मिसाइलें किसी भी पल मिडिल ईस्ट के देशों में तैनात अमेरिकी बेसों पर कहर को तैयार हैं। ईरानी सुप्रीम कमांडर ने कहा है कि इस्लामिक रिपब्लिक गार्डस कोर अमेरिका को बहुत ही माकूल और सख्त लहजे में जबाव देने जा रही है। जो हालात बने हुए हैं उसके चलते लगता है कि ईरान और अमेरिका के बीच अब बड़ी लड़ाई दुनिया को देखने को मिलने जा रही है। ईरान और अमेरिका के बीच लड़ाई के इस नए अध्याय के खुल जाने के बाद पूरी दुनिया में आर्थिक मंच पर भारी उथल पुथल देखी जा रही है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित भारत जैसे देश हो रहे हैं जहां रसाई गैस की भारी किल्लत है। जिनके पास पर्ची नहीं है उनकी मानें तो दो से पांच हजार तक एलपीजी का रसोई गैस सिलेंडर उन्हें क्रय करना पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $126.41 प्रति बैरल तक पहुंचने से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता बढ़ गई है।
मचेगा महंगाई का हा-हाकार
दुनिया इस समय एक बड़े आर्थिक और भू-राजनीतिक मोड़ पर खड़ी है। International Monetary Fund (IMF) की प्रमुख Kristalina Georgieva ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बेहद गंभीर हो सकता है। खासतौर पर तेल की कीमतों में तेज उछाल, महंगाई में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास की रफ्तार में गिरावट जैसे हालात और भी बिगड़ सकते हैं। अगर कच्चे तेल की कीमतें 100 से 125 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती हैं, तो इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। पेट्रोल-डीजल महंगे होंगे, ट्रांसपोर्ट का खर्च बढ़ेगा और खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो जाएंगी। IMF के मुताबिक, अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो 2026-27 तक वैश्विक विकास दर घटकर लगभग 2.5% तक आ सकती है, जबकि महंगाई 5% से ऊपर जा सकती है।
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