मेरठ/ श्रीराम जन्मोत्सव के अवसर पर विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल ने आज शहर में शोभायात्रा निकाली। यात्रा में भारत माता और राम आरती कर पूजन किया गया तत्पश्चात क्षेत्र संगठन मंत्री मुकेश खांडेकर ने यात्रा का भगवा पातका दिखाकर शुभारंभ किया। शोभायात्रा में सैकड़ों रामभक्त व बजरंग दल के कार्यकर्ता शामिल हुए, भगवा ध्वज लेकर शोभायात्रा में शामिल रामभक्तो के जय श्रीराम व हर हर महादेव, भारत माता की जय के जयकारे गूंज रहे थे, वहीं रामभक्ति गीतों की गूंज से लोगों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा था। भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच निकली शोभायात्रा का जगह-जगह अभिवादन किया गया, यात्रा मार्ग में कई स्थानों प रामभक्तों के लिए शरबत व पेयजल के स्टॉल लगाये गए थे। राम जन्मोत्सव पर विहिप और बजरंग दल द्वारा आयोजित इस शोभा यात्राओं में बाबा बर्फानी, श्रीराम, जानकी, लक्ष्मण और हनुमान जी के रौद्र और मनमोहक रूपों की झांकियां सजाई गईं और फूल बरसाकर स्वागत किया गया। यह यात्रा बालाजी मंदिर सदर मेरठ से शुरू होकर भारत माता मंदिर, रेलवे रोड, डी एन चोपला, पी एल शर्मा अस्पताल, बुढ़ाना गेट, बच्चा पार्क, बेगमपुल, हनुमान चौक सदर, औघड़नाथ मंदिर होते हुए वापस हनुमान मंदिर पर समाप्त हुई। गणमान्य नागरिक एवं सामाजिक संगठन भी यात्रा में सहभागी रहे। आयोजकों ने इसे सनातन संस्कृति के प्रति जन-जागरण का प्रयास बताया। भक्ति गीतों की गूंज और श्रद्धालुओं का उत्साह माहौल को आस्थामय बनाता रहा। इससे पूर्व मुख्य वक्ता मुकेश खांडेकर ने अपने उद्बोधन में कहा कि हमारे समाज की ताकत विविधता में है। जब हिन्दू समाज कंधा मिलाते हैं, जब बुजुर्ग अनुभव बाँटते हैं और युवा नई सोच लाते हैं, तब समाज आगे बढ़ता है। यह यात्रा उन्हीं पुलों को मजबूत करेगी।
उन्होंने कहा कि साबरी प्रसंग हमें याद दिलाता है कि राम के लिए भक्ति ही एकमात्र पहचान थी—जाति, वर्ण या सामाजिक स्थिति का कोई बंधन नहीं, झूठे बेर चुनकर भगवान को अर्पित करने वाली साबरी को राम ने सहज स्वीकार किया और समानता और करुणा का सर्वोच्च उदाहरण दिया, राम-साबरी का संवाद बताता है कि राष्ट्र-निर्माण तभी सार्थक है जब अंतिम पंक्ति का व्यक्ति भी गौरव के साथ खड़ा हो। इसी तरह राम और केवट की कहानी हमें सरलता और समानता का असली मतलब सिखाती है राम-केवट प्रसंग। वनवास के दौरान प्रभु राम गंगा पार करने के लिए केवट के पास पहुँचते हैं। केवट, जो खुद को छोटा-मोटा नाविक मानता है, राम के चरण धोने को आतुर हो जाता है—उसे डर है कि उनके चरण-स्पर्श से नाव भी पवित्र हो कर उसे ‘बड़ाÓ बना देगी, और वह अपना सहज काम खो देगा। राम मुस्कुराते हैं, विनम्रता से चरण धुलवाते हैं, और केवट को मित्र की तरह गले लगाते हैं।
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