Home मेरठ देवों के देव महादेव वैराग्य व योग के अधिष्ठाता
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देवों के देव महादेव वैराग्य व योग के अधिष्ठाता

रुद्रावतार श्री हनुमान जी के जन्मोत्सव पर भक्ति-सूत्र सिखाने आई है शिव कथा- डॉ. सर्वेश्वर

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देवों के देव महादेव वैराग्य व योग के अधिष्ठाता
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मेरठ। देवों के देव महादेव शिव वैराग्य व योग के अधिष्ठाता हैं। समाज से बहिष्कृत भूत प्राणियों के एकमेव आश्रय स्थल भूतनाथ हैं महादेव। भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम हैं महादेव। त्रेताकल में महादेव ने ही तो हनुमान अवतार धारण कर राम-भक्ति का अनुपम उदाहरण समाज के सामने प्रस्तुत किया और साथ ही साथ शक्ति का पर्याय बन अधर्म की हर उस प्राचीर को भी ध्वस्त किया, जो धर्म स्थापना में बाधक बन खड़ी थी।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा गढ़ रोड स्थित बुद्धा गार्डन में 1 से 7 अप्रैल तक सात-दिवसीय श्री शिवकथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसका समय सांय 04:30 बजे से रात्रि 08:30 बजे तक है। 1 अप्रैल को कथा के आरम्भ से पूर्व 31 वेद-पाठियों द्वारा रुद्री-पाठ का विशुद्ध रूप से सामूहिक उच्चारण किया गया! इन वेद मन्त्रों की ध्वनि से वातावरण अत्यंत पवित्र, ऊर्जावान और दिव्य हो उठा
कथा के प्रथम दिवस गुरुदेव आशुतोष महाराज के शिष्य – कथाव्यास डॉ. सर्वेश्वर जी ने कथा माहात्म्य का वर्णन करते हुए बताया कि भारतीय संस्कृति के प्राण चिरकाल से ही आध्यात्मिकता में बसते हैं। इसी आध्यात्मिक शक्ति के संवाहक रहें हैं हमारे आर्ष ग्रन्थ। वेद, पुराण, उपनिषद् इत्यादि ने सदैव जनमानस के सामने सफल जीवन जीने के सूत्र रखे हैं। प्रभु की पावन कथा द्वारा संतों महापुरुषों के माध्यम से इन्हीं पुराणों का सार समाज में प्रसारित किया जाता रहा है। अगर बात करें भगवान भोलेनाथ की पावन कथा की तो आज भारत ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व में भगवान शिव के असंख्य भक्त उनकी उपासना करते हैं। विश्व की विभिन्न प्राचीन सभ्यताओं में भी भगवान शिव की उपासना के विस्तृत प्रमाण मौजूद हैं। और ये हो भी क्यों न शिव तो देवों के देव महादेव हैं। वैराग्य व योग के अधिष्ठाता हैं महादेव। समाज से बहिष्कृत भूत प्राणियों के एकमेव आश्रय स्थल भूतनाथ हैं महादेव। भक्ति और शक्ति का अद्भुत संगम हैं महादेव। त्रेताकल में महादेव ने ही तो हनुमान अवतार धारण कर राम-भक्ति का अनुपम उदाहरण समाज के सामने प्रस्तुत किया और साथ ही साथ शक्ति का पर्याय बन अधर्म की हर उस प्राचीर को भी ध्वस्त किया, जो धर्म स्थापना में बाधक बन खड़ी थी। आज भारत देश में इन दोनों शिव तत्वों अर्थात् निष्काम भक्ति और सकारात्मक शक्ति का ही तो अभाव है, जिसके कारण भारत देश रुपी देह निष्प्राण होती जा रही है जिसमें से हिंसा, वैमनस्य, मतभेद, अलगाव रुपी कुरीतियों की भयंकर दुर्गन्ध उठ रही है। श्री हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर प्रारम्भ हुई यह शिव कथा इन्हीं सनातन शिव-तत्वों को ब्रह्मज्ञान के माध्यम से घट में प्रकट करने आई है। ताकि शिव की संतानें ‘सत्यं शिवं सुन्दरमÓ के सूत्र का अनुसरण करते हुए इस माया युक्त संसार में सत्य का वरण कर शिव पथ अर्थात् कल्याणकारी पथ पर आगे बढ़ें और अपने जीवन को सुंदर बना लें।
इस दिव्य आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालुओं एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंच पर दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के संगीतकार शिष्यों ने अपनी मधुर वाणी में महादेव के सुमधुर भजनों की प्रस्तुति देकर सभी को भगवान भोलेनाथ की भक्ति में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षणों में भोलेनाथ का सुंदर दरबार एवं मनोहारी झांकियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय रहे। इस विलक्षण आयोजन का प्रथम दिवस दिव्य आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आशुतोष महाराज जी के दिव्य मार्गदर्शन में चल रही एक सामाजिक एवं आध्यात्मिक संस्थान है, जिसका ध्येय है आध्यात्मिक जागृति द्वारा विश्व में शांति की स्थापना करना। संस्थान द्वारा देश भर में कई सामजिक प्रकल्प भी चलाये जा रहे हैं, जैसे – नशा मुक्ति के लिए ‘बोध प्रकल्पÓ, अभावग्रस्त बच्चों की शिक्षा हेतु ‘मंथन प्रकल्पÓ, महिलाओं के सशक्तिकरण हेतु ‘संतुलन प्रकल्पÓ, पर्यावरण संरक्षण हेतु ‘संरक्षण प्रकल्पÓ, गो संरक्षण, संवर्धन एवं नस्ल सुधार हेतु ‘कामधेनु प्रकल्पÓ, समाज के सम्पूर्ण स्वास्थय हेतु ‘आरोग्य प्रकल्पÓ, आपदा प्रबंधन हेतु ‘समाधान प्रकल्पÓ, तथा नेत्रहीनो व विकलांगों के सशक्तिकरण हेतु

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