सुप्रीमकोर्ट के दो जजों की धरने पर बैठने की चेतावनी
5
Share
Share
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने यह बात हल्के-फुल्के अंदाज में (लाइट नोट पर) प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए एक सख्त चेतावनी के रूप में कही थी। कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को 25 नवंबर 2026 तक का समय दिया है। कोर्ट ने हल्के-फुल्के लेकिन सख्त लहजे में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) से कहा, “अगर अगली सुनवाई तक काम पूरा नहीं हुआ, तो हम दोनों (जज) दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य गेट पर धरने पर बैठ जाएंगे और तब तक घर नहीं जाएंगे जब तक आप काम पूरा नहीं कर लेते। और हम आपको (ASG को) भी घर नहीं जाने देंगे।” सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह मौखिक टिप्पणी की।
क्या था मामला
अक्टूबर 2026 में सुप्रीम कोर्ट में मथुरा रोड (दिल्ली हाईकोर्ट और दिल्ली चिड़ियाघर के पास) पर पैदल यात्रियों, वकीलों और बच्चों के सड़क पार करने के लिए सुरक्षित फुटपाथ और जेब्रा क्रॉसिंग न होने के मामले पर सुनवाई चल रही थी। इस व्यस्त सड़क पर सुरक्षा इंतजाम न होने से लोगों की जान का खतरा बना रहता है।
इसलिए हुए नाराज जज
सुनवाई के दौरान जब सरकार की तरफ से कहा गया कि इसके लिए एक हाई-लेवल कमेटी बनाई गई है, तो कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि सड़क पर पेंट और इंजीनियरिंग के छोटे से काम के लिए कागजी कमेटियों की जरूरत नहीं है, बल्कि जमीन पर काम दिखना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित पैदल चलना संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21) के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है और प्रशासन को इसे गंभीरता से लेना होगा।
Leave a comment