Release of terrorists: Government's surrender or result of pressure?
Share
आतंकी गतिविधियों के आरोप में पकड़े गए एक अमेरिकी और छह यूक्रेनियों को अनिवार्य जमानत, देश जाने की अनुमति
नई दिल्ली। भारत में आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामले में जिन सात आतंकियों को पकड़ा गया था, दिल्ली की एक विशेष अदालत ने इन सभी को ‘डिफ़ॉल्ट बेल’ (Default Bail) यानी अनिवार्य जमानत दे दी है। इसको लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) सवालों के कठघरे में है। सोशल मीडिया पर इसको एनएसए से जोड़कर प्रचारित किया जा रहा है साथ ही कुछ का कहना है कि यह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विफलता है। जिन्हें छोड़ा गया है उनमें एक अमेरिकी और छह यूक्रेनी नागरिक हैं जो आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने के आरोप मेंराष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अरेस्ट किए थे। इसको मोदी सरकार की विफलता के रूप में भी सोशल मीडिया पर प्रचारित किया जा रहा है। इनमें एक अमेरिकी नागरिक (मैथ्यू एरॉन वैनडायके) और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। इन्हें मार्च 2026 में भारत-म्यांमार सीमा के पास जातीय सशस्त्र समूहों को कथित तौर पर ड्रोन और हथियारों की ट्रेनिंग देने के आरोप में पकड़ा गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली की राउज एवेन्यू अदालत ने इन्हें एक महीने के लिए अपने देशों (अमेरिका और यूक्रेन) जाने और परिवारों से मिलने की अनुमति भी दे दी है।
चार्जशीट दाखिल नहीं कर पायी एनआईए (NIA)
एनआईए (NIA) कानून के तहत निर्धारित 180 दिनों की समय सीमा के भीतर आरोपियों के खिलाफ अदालत में जरूरी चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल करने में विफल रही। भारतीय कानून के अनुसार, यदि तय समय में चार्जशीट दाखिल नहीं होती, तो आरोपी को ‘डिफ़ॉल्ट बेल’ का अधिकार मिल जाता है। शुरुआत में इन पर कड़े आतंकवाद विरोधी कानून यूएपीए (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, बाद में एनआईए ने यूएपीए की धाराएं हटा दीं और मामला केवल विदेशी अधिनियम (Foreigners Act) और आव्रजन नियमों के उल्लंघन तक सीमित रह गया।
आरोपियों का बैकग्राउंड और आरोप
इस मामले में मुख्य आरोपी मैथ्यू एरॉन वैनडायके (Matthew Aaron VanDyke) नामक एक अमेरिकी नागरिक (जिसे कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में मर्सिनरी या भाड़े का सैनिक भी कहा गया) और 6 यूक्रेनी नागरिक (कमिंस्की विक्टर, हुरबा पेट्रो, स्लीव्याक तारास आदि) शामिल हैं। : एनआईए का आरोप था कि ये सभी लोग दिसंबर 2025 में भारत आए थे। इन्होंने बिना अनुमति (Restricted Area Permit के बिना) असम और मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश किया और अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार के ‘विक्टोरिया कैंप’ पहुंचे। ये विदेशी नागरिक म्यांमार के जातीय सशस्त्र विद्रोही समूहों (Ethnic Armed Organizations) को ड्रोन संचालन, ड्रोन असेंबली (जोड़ना) और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग टेक्नोलॉजी का प्रशिक्षण दे रहे थे। जांच में यह बात भी सामने आई कि यूरोप से भारी मात्रा में ड्रोन और उनके पुर्जे भारत के रास्ते म्यांमार भेजे जा रहे थे।
विमान हमले से कनेक्शन
जांच के दौरान एनआईए ने दिल्ली की अदालत को बताया था कि इन आरोपियों के तार म्यांमार में एक नागरिक विमान पर हुए हमले से जुड़े हो सकते हैं। म्यांमार के म्यित्कीना (Myitkyina) एयरपोर्ट पर एक ड्रोन ‘म्यांमार नेशनल एयरलाइंस’ के विमान से टकराया था, जिससे ड्रोन वारफेयर का गंभीर खतरा पैदा हो गया था। इसी वजह से इन पर आतंकवाद विरोधी कड़े कानून UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया था। शारीरिक रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जांच में शामिल होना होगा। विपक्षी दलों और सुरक्षा विश्लेषकों के बीच इस बात को लेकर काफी राजनीतिक बहस भी छिड़ी हुई है कि क्या कूटनीतिक दबाव के चलते आतंकवाद की धाराएं हटाई गईं।
Leave a comment