बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, पीछे हटने को तैयार नहीं वकील
नई दिल्ली। बार काउसिंल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन मिश्रा पूरी तरह से अलग थलग पड़ गए हैं। वकील उनके इस्तीफे पर अड़े हुए हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने भारी भीड़ और समर्थकों के जुटने की संभावना का हवाला देते हुए शनिवार को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस को सोमवार (2.30 बजे) तक के लिए टाल दिया है। इस बीच, नालसार (NALSAR) विश्वविद्यालय विवाद और अन्य कार्यप्रणालियों को लेकर वकीलों का विरोध प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग लगातार जारी है। उल्लेखनीय है कि नालसार प्रकरण को लेकर मनन मिश्रा पर सीजेआई ने भी नाराजगी जतायी थी। हालांकि बाद में मनन मिश्रा को बैकफुट पर आना पड़ गया। सीजेआई सूर्यकांत के आमंत्रण के विरोध पर छात्रों के एनरोलमेंट को रोकने वाला बीसीआई का आदेश (जो बाद में वापस ले लिया गया था)। ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन और अन्य समूहों द्वारा चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग। अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने, वकीलों को बीमा सुरक्षा देने और विधि कॉलेजों में पारदर्शिता की मांग।
BCI के आदेश की निंदा
वहीं दूसरी ओर नालसर विधि विश्वविद्यालय के छात्रों ने शनिवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के उस आदेश की निंदा की, जिसमें सभी राज्य बार काउंसिल को यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के स्नातकों का अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण करने से रोक दिया गया था। इससे पहले वकील लीगल कॉकरोच नहीं हैं’।बार काउंसिल के अध्यक्ष ने इस्तीफे की मांग पर कहा, ‘मैंने 12 से 14 साल तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन के तौर पर काम किया है क्योंकि मैं चुना गया था। मैंने सात बार चुनाव जीता है।’ मनन कुमार मिश्रा ने आगे कहा, ‘वकील कॉकरोच नहीं हो सकते, वे बुद्धिजीवी हैं। ये जो सीजेपी ने लीगल कॉकरोच का नाम दिया है, ये बहुत ही शर्म की बात है। ये बात वकील बर्दाश्त नहीं करेंगे, युवा अधिवक्ता बर्दाश्त नहीं करेंगे।’स्टूडेंट बार काउंसिल ने मिश्रा की उस टिप्पणी पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुछ शिक्षक और बाहरी लोग निर्दोष छात्रों को भड़काने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
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