यूपी सरकार ने जारी किया फरमान, उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बिना अनुमति बाहरी लोगों और यूट्यूबर्स के प्रवेश को लेकर कई ज़िलों में आदेश जारी
नई दिल्ली/लखनऊ/मेरठ। यूपी सरकार जेन अल्फा से बुरी तरह से घबरायी हुई है। यूपी में सरकारी बेसिक शिक्षा के स्कूलों की बदाहली से लगतार है कि सरकार भी बेखबर नहीं, इसी के चलते फरमान जारी किया गया है कि यूपी के बेसिक शिक्षा के स्कूलो में कोई भी आउटर प्रवेश ना करे। इसके लिए सूबे भर के प्रशासनिक अधिकारियों को चिट्ठी भेजी गयी है। हालांकि अफसरों ने सरकार की चिट्टी का बचाव करते हुए कहा है कि शासन ने स्कूलों में जो भी कुछ खामियां हैं उनको सुधारने के निर्देश चिट्टी में दिए हैं। सूबे की राजधानी लखनऊ में जेन अल्फा सड़कों पर उतरकर स्कूली शिक्षा को लेकर यूपी सरकार का आइना दिखा चुके हैं। केवल लखनऊ ही नहीं यूपी के कई शहरों और मेरठ में भी बेसिक शिक्षा के सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बदहाली सामने आ चुकी है। ऐंसा कोई पहली बार नहीं हुआ है, लेकिन इस बार जेन अल्फा के आंदोलन के चलते लगता है कि सूबे की सरकार बुरी तरह से डरी हई है। इसलिए प्रदेश भर में कई जिलों में अब तक वहां के शिक्षा अधिकारियों ने फरमान जारी कर बाहरी की एंट्री पर सख्ती से रोक लगा दी है।
स्कूल ठीक करने के बजाए सख्ती
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से ऐसे आदेश सामने आए हैं।इस बीच, उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में जेन अल्फा छात्र-छात्राएं स्कूलों की समस्याओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसके बाद आजमगढ़, बलिया, आगरा, बस्ती, अयोध्या और बलरामपुर समेत कई जिलों में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बिना अनुमति बाहरी लोगों के स्कूल परिसर में प्रवेश और फोटो या वीडियोग्राफी पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।अयोध्या के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लाल चन्द्र ने आदेश जारी करते हुए बाहरी व्यक्तियों और युट्यूबर के प्रवेश पर रोक लगा दी है। हालांकि इस मामले को लेकर सरकार की फजीहत होने के बाद कुछ जनपदों में वहां के बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से दी गयी सफाई में कहा गया है कि “हमारे शिक्षकों और शिक्षक संघ की ओर से मांग के बाद यह आदेश जारी किया गया है।” स्कूल में महिला शिक्षक और बालिकाएं पढ़ाई करती हैं, उनकी सुरक्षा को देखते हुए आदेश जारी किया गया है।क्या जेन अल्फ़ा आंदोलन को देखते हुए यह आदेश जारी किया गया है? इस सवाल के जवाब उन्होंने कहा, “जेन अल्फ़ा के आंदोलन को देखते हुए नहीं बल्कि ऐसे लोगों को प्रवेश की मनाही है जो वीडियो रिकॉर्डिंग ऑन करके प्रवेश करते हैं। स्कूल में मौजूद प्रिंसिपल की अनुमति या प्रॉपर चैनल के इस्तेमाल के बाद प्रवेश कर सकते हैं।” स्कूल ठीक करो अभियान को लेकर मेरठ जनपद में भी टीम काक्राॅच एक्टिव है। इसके कई सदस्यों ने बीती 15 अगस्त को गांव देहात के कई स्कूलों का मौके पर जाकर मुआयना किया तो तमाम खामियां सामने आ गयीं। जिनमें स्कूल परिसर में झाड़ियां, किसी स्कूल में बच्चे थे तो टीचर नहीं थे तो किसी स्कूल में टीचरों के अनुपात में बच्चों की संख्या नहीं थी। एक स्कूल में बेटियों के लिए बुनियादी सुविधा तक मय्यसर नहीं थीं।
पुलिस की ली जा रही मदद
जेन अल्फा से डरी यूपी की सरकार अब बच्चों के आंदोलन से निपटने के लिए पुलिस का सहारा लेने पर उतर आयी है। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में खराब और टूटी सड़क की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे स्कूली बच्चों (जेन अल्फा) के साथ पुलिस द्वारा बदसलूकी और उन्हें बलपूर्वक हटाने का मामला सामने आया है। 19 अगस्त 2026 को महोबा के रैपुरा कलां गांव के बच्चों ने खराब रास्तों और जलभराव से परेशान होकर झांसी-मिर्जापुर हाईवे पर जाम लगा दिया था। जाम खुलवाने पहुँची पुलिस पर आरोप लगा कि उन्होंने बच्चों के साथ धक्का-मुक्की की, उन्हें घसीटा और कथित तौर पर लात मारकर व डरा-धमकाकर सड़क से हटाया।
अब तक इन जिलों में जेन अल्फा सड़कों पर
उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों (जेन अल्फा) का आंदोलन मुख्य रूप से फतेहपुर, लखनऊ, महोबा, हमीरपुर, उन्नाव, कन्नौज, आजमगढ़ और मुरादाबाद जैसे जिलों में फैल चुका है। इन जिलों में 12 से 14 साल तक के बच्चे बुनियादी सुविधाओं, खस्ताहाल सड़कों और शिक्षकों की कमी को लेकर लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। इसके बाद ही सरकार की नींद टूटी और बेसिक के स्कूलों में आउटर के प्रवेश पर रोक का फरमान जारी कर दिया।
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