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सरधना में किसका खेल खराब करेंगे विनीत भराला

सरधना में किसका खेल खराब करेंगे विनीत भराला

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सरधना में किसका खेल खराब करेंगे विनीत भराला
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विनीत भराला को बसपा के उम्मीदवार बनाए जाने से सरधना विधानसभा में इस बार मुकाबला त्रिकोणयी होने की उम्मीद

मेरठ। सरधना विधानसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी ने जाट नेता विनीत भराला को अपना उम्मीदवार बनाया है। विनीत भराला की उम्मीदवारी से समाजवादी पार्टी को वोटों का नुकसान पहुंच सकता है क्योंकि विनीत भराला पहले समाजवादी पार्टी में थे और जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इससे सपा के जाट और स्थानीय समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि जानकाराें की मानें तो ऐसा नहीं कि खतरा केवल समाजवादी पार्टी प्रत्याशी को ही होगा। भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी को भी नुकसान की पूरी आशंका जतायी जा रही है। चूंकि विनीत भराला जाट समाज से आते हैं, वे इस सीट पर भाजपा के फायरब्रांड नेता संगीत सोम के पारंपरिक जाट वोटों में भी सेंध लगाने की कोशिश करेंगे, जिससे भाजपा का चुनावी गणित भी प्रभावित हो सकता है। इस उम्मीदवारी से बसपा सरधना में दलित, मुस्लिम और जाट वोटों के नए समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, जिससे मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद दिलचस्प हो गया है।

जातिगत समीकरण

मेरठ की सरधना विधानसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3.61 लाख है। इस सीट पर कोई भी आधिकारिक जातिगत जनगणना का डेटा सार्वजनिक नहीं होता है, लेकिन राजनीतिक दलों, मीडिया रिपोर्टों और चुनावी विश्लेषकों के अनुसार यहाँ का अनुमानित जातिगत समीकरण की मानें तो मुस्लिम लगभग 85,000 से 1,000,000। दलित (SC)लगभग 65,000 से 75,000 मतदाता हैं। ठाकुर / राजपूत लगभग 55,000 से 60,000 मतदाता हैं और इनके अलावा यदि जाट मतदाताओं की बात करें तो उनकी संख्या करीब 45,000 से 50,000 बतायी जा रही है। इस सीट पर सबसे बड़ी आबादी मुस्लिम और दलित मतदाताओं की है, जो मिलकर चुनाव की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। राजपूत (ठाकुर), जाट और गुर्जर वोटों का ध्रुवीकरण और बिखराव ही यह तय करता है कि इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी (SP) या बहुजन समाज पार्टी (BSP) में से किसकी जीत होगी।

कौन नफे में कौन नुकसान में

विनीत भराला की उम्मीदवारी के बाद सरधना विधानसभा सीट से कौन नफे में है और कौन नुकसान में इसको लेकर भी मंथन चल रहा है। भाजपा की ओर से संगीत सोम की और सपा की ओर से विधायक अतुल प्रधान की उम्मीदवारी तय मानी जा रही है। इस विधानसभा सीट के करीब एक लाख मुसलमान मतदाताओं की बात की जाए तो आमतौर पर मुसलमान को समाजवादीपार्टी पार्टी का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है। इससे पहले मुसलमानों को कांग्रेस समर्थक माना जाता रहा है। बीच में मुसलमानों का रूझान बसपा की ओर भी चला गया था लेकिन बसपा का हवा पानी उन्हें रास नहीं आया। लेकिन सरधना विधानसभा की यदि बात करें तो मुसलमान इस बार अतुत प्रधान से जबरदस्त नाराज दिखाई दे रहे हैं। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं निकाला जा सकता कि अतुल प्रधान से मुसलमानों की नाराजगी का फायदा विनीत भराला उठा लेंगे, क्योंकि करीबियों का कहना है कि अतुल प्रधान डेमेज कंट्रोल में जुट गए हैं ताकि मुसलमानों की नाराजगी को दूर किया जा सके। सरधना विधानसभा में दूसरे सबसे ज्यादा मतदाता ठाकुर है उनकी संख्या करीब 55,000 से 60,000। लेकिन ठाकुर चौबीसी की नाराजगी का स्वाद भाजपा के संगीत सोम एक बार चख चुके हैं। ठाकुरों ने उन्हें नकार दिया था नतीजा यह हुआ कि अतुल प्रधान सरधना का चुनावी महासमर जीत गए। इस बार ठाकुर मतदाता कहां जाएंगे। यह कहना जल्दबाजी होगी। अब रही बात जाट मतदाताओं की तो उनकी संख्या महज लगभग पचास हजार है। यदि पचास हजार जाट मतदाताओं के बूते पर बसपा उम्मीदवार यह चुनाव जीतने का सपना देख रहे हैं तो यह केवल दिवास्वप्न ही कहलाएगा। हालांकि इसमें कोई दो राय नहीं कि विनीत भराला के आने के बाद सरधना विधानसभा का चुनाव त्रिकोणीय हो गया है। यदि किसी दूसरी पार्टी से कोई मुस्लिम नहीं आता तो एक विधानसभा के करीब एक लाख मतदाताओं साइकिल की सवारी करते नजर आएंगे।

मुसलमान साबित होंगे निर्णायक

चुनाव परिणाम को लेकर अभी किसी नतीजे पर पहुंचना तो जल्दबाजी होगी, लेकिन सरधना विधानासभा के एक लाख मुस्लिम मतदाता निर्णायक अवस्था में जरूर हैं। उन्हें निर्णायक इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि देश और प्रदेश खासतौर से योगी सरकार के कार्यकाल के दौरान मुस्लिमों को यह समझ में आ गया है कि बंटेंगे तो कटेंगे..। जानकारों का कहना है कि इस चुनाव में केवल सरधना ही नहीं पूरे प्रदेश के मुसलमान ना बंटने की ठान चुके हैं। जिन विधानसभा सीटों पर मुसलमान निर्णायक स्थिति में हैं वहां उनका पूरा प्रयास होगा कि भाजपा को रोकने का काम करें।
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