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हस्तिनापुर में कार्रवाई के इंतजार में बिक गई सरकारी जमीन

हस्तिनापुर में कार्रवाई के इंतजार में बिक गई सरकारी जमीन

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हस्तिनापुर में कार्रवाई के इंतजार में बिक गई सरकारी जमीन
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मेरठ। सीएम योगी आदित्यनाथ भले ही सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों को लेकर गंभीर हो और सरकारी जमीनों पर कब्जे करने वालों के घर पर बुल्डोजर चलाने के आदेश अफसरों को देते रहें, लेकिन यहां मेरठ में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे करने वालों पर मकानों पर बुल्डोजर चलाने के बजाए जिला प्रशासन और तहसील के अफसर भूमाफियाओं के मददगार साबित हो रहे हैं। साल 2006 में जिनके खिलाफ तत्कालीन जिलाधिकारी ने सरकारी जमीन से बेदखली के आदेश दे दिए हों, ऐसे भूमाफियाओं जिन्होंने सरकारी जमीन पर ना केवल कब्जे कर लिए हैं वहां पक्के मकान बना लिए और उनकी खरीद व बेच भी कर ली है, उन पर कार्रवाई के बजाए अभी तो उनके मददगार बने हुए हैं।

यह है पूरा मामला

जनपद के हस्तिनापुर के गांव समसपुर में खसरा नं0-254 भू-राजस्व रिकार्ड में खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है। ग्राम सभा की इस जमीन पर गांव के मलखान ने कब्जा कर लिया। जिसकी शिकायत की गयी। एक लंबी प्रक्रिया के बाद साल 2006 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने मलखान द्वारा ग्राम सभा की जमीन पर कब्जे को लेकर कार्रवाई करते हुए बेदखली के आदेश दिए थे। यह बात अलग है कि जिस सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा हटाने के लिए बेदखली के आदेश किए गए थे, वहां आज भी उस जमीन पर काविज उनका परिवार पूरे सिस्टम को ठेंगा दिखा रहा है। हस्तिनापुर के गांव समसपुर में खसरा नं0-254 से अवैध कब्जे हटाने के आदेश उसके बाद भी दो बार हो चुके हैं। अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ शिकायत करने वाले संजीव कुमार पुत्र ताराचंद निवासी समसपुर बताते हैं कि साल 2006 के बाद साल तहसीलदार मवाना के स्तर से दो बार बेदखली किए जाने के आदेश तो दिए गए, लेकिन जिनको इन आदेशों का अनुपालन करना था उन्होंने बेदखली के आदेशों को फाइल से बाहर ही नहीं निकलने दिया। बेदखली के आदेश फाइल में ही घुटकर रह गए हैं। इसको लेकर सीएम योगी, डीएम मेरठ और एसडीएम मवाना तक से शिकायतें की जा चुकी हैं। आईजीआरएस पोर्टल की मार्फत शासन में बैठे उच्च पदस्थ अधिकारियों के संज्ञान में पूरा मामला यह लाया जा चुका है। कार्रवाई के आदेश भी हर बार होते हैं, लेकिन जिन्हें कार्रवाई करनी है उनकी नींद टूटती नजर नहीं आ रही है। संजीव कुमार जब-जब शिकायत करते हैं तब तब कार्रवाई के आदेश भी संबंधित अधिकारी कर देते हैं, लेकिन यह बात अलग है कि इन आदेशों को फाइलों में ही दफन कर दिया जाता है या फिर कार्रवाई के नाम पर महज खानापूर्ति भर की जा रही है। जिसके चलते समसपुर की इस बेशकीमती जमीन पर लगातार ना केवल कब्जा बना हुआ है बल्कि वहां अवैध निर्माण कर पक्के मकान भी खड़े कर लिए हैं।

67/1 की कार्रवाई के आदेश

संजीव कुमार बताते हैं कि इस मामले में सबसे दुखद और हैरानी भरी बात यह है कि मुख्य आरोपी सतबीर पुत्र मलखान के पुत्र गौरव के खिलाफ तहसीलदार ने 67/1 की कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं। होना तो यह चाहिए था कि इस आदेशों के बाद उसके खिलाफ 420 की धारा में मुदकमा दर्ज किया जाता, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। इसके इतर गौरव पुत्र मलखान ने जिस जगह पर वो लोग काविज हैं उस जगह को मुजफ्फर नगर निवासी किसी नलिनी नाम की महिला से खरीदा हुआ कागजों में दिखा दिया है। सबसे बड़ी हैरानी की बात तो यह है कि कोई भी सरकारी जमीन की खरीद फराेख्त नहीं कर सकता। लेकिन गौरव के नाम पर ना केवल सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त रजिस्ट्रार की आफिस के फाइलों में दर्ज है बल्कि वहां पक्का मकान भी बनाकर खड़ा कर दिया है। इस मामले के सामने आने से समझा जा सकता है कि सिस्टम किस प्रकार से कार्रवाई कर रहा है। संजीव कुमार यह भी बताते हैं कि इसके लिए तहसील के जिन अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है उन्होंने भी सरकारी जमीन की जो रजिस्ट्री करा ली गयी है उसको निरस्त कराने का कोई प्रयास नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि आज भी सरकारी जमीन पर इन लोगों का अवैध कब्जा है। जिस भी अधिकारी से शिकायत की जाती है वो आदेश तो करते हैं लेकिन जिन्हें कार्रवाई करनी है वो कार्रवाई के बजाए आरोपियों के पाले में खड़े नजर आते हैं।

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