Home देहरादून कान्हा शांति वनम में शबद कीर्तन और ध्यान ने सभी धर्मों के लोगों को जोड़ा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष पर
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कान्हा शांति वनम में शबद कीर्तन और ध्यान ने सभी धर्मों के लोगों को जोड़ा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष पर

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उत्तराखंड के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह जी को गुरुवार को कान्हा शांति वनम में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के उपलक्ष्य में हार्टफुलनेस के मार्गदर्शक और श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष आदरणीय दाजी द्वारा सम्मानित किया गया।

देहरादून: गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के अवसर पर, पूज्य बाबूजी महाराज की 127वीं जयंती और तुकडोजी महाराज की 117वीं जयंती के साथ संयुक्त रूप से भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कान्हा शांति वनम स्थित हार्टफुलनेस मुख्यालय के विश्व के सबसे बड़े ध्यान कक्ष में आयोजित हुआ।

भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय और हार्टफुलनेस द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन परिसर शबद कीर्तन की मधुर ध्वनियों और सामूहिक ध्यान से गूंज उठा। देशभर से 30,000 से अधिक लोग इसमें शामिल हुए, जबकि विश्वभर से अनेक लोगों ने वर्चुअल रूप से सहभागिता की। प्रतिभागियों ने प्रेरणादायक प्रवचन, प्रदर्शनी और गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर आधारित विशेष फिल्म का आनंद लिया तथा सामूहिक ध्यान के लाभ प्राप्त किए।

इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद; उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह; केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत; तथा संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त मेजर सुनील दत्त द्विवेदी (विधायक, फतेहगढ़), अर्पित दुबे और ईश्वर आचार्य (संयुक्त सचिव, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान), काशीनाथ समागड़ी (निदेशक) तथा समाजसेवी गुरलाद सिंह कहलोन भी उपस्थित रहे।

प्रख्यात गायक डॉ. अलंकार सिंह ने मधुर शबद कीर्तन प्रस्तुत किया, जिसके बाद विचार गोष्ठी, प्रदर्शनी और फिल्म प्रदर्शन हुआ। इसके पश्चात सामूहिक ध्यान सत्र दाजी (हार्टफुलनेस मार्गदर्शक एवं श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष) द्वारा संचालित किया गया। राष्ट्रसंत समुदाय के सदस्य भी उत्साहपूर्वक इसमें सम्मिलित हुए।

अपने संबोधन में राम नाथ कोविंद ने कहा:
“भारत महान आध्यात्मिक गुरुओं की भूमि है, जिन्होंने सदैव मानवीय मूल्यों का मार्गदर्शन किया है। मानव अधिकारों की रक्षा, धर्म और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए निडरता से खड़ा होना गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं का मूल है। बाबूजी महाराज ने हमें आध्यात्मिक साधना में निरंतरता का संदेश दिया, जबकि तुकडोजी महाराज ने मानवता के उत्थान का मार्ग दिखाया। हम सौभाग्यशाली हैं कि इस पावन अवसर पर इन महान संतों की शिक्षाओं से प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।”

दाजी ने कहा: “यह एक अत्यंत शुभ अवसर है, जब हम सामूहिक ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा हेतु अद्वितीय साहस का परिचय दिया। सत्य के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति निडर होता है। बाबूजी महाराज ने सादगी और निरंतर स्मरण का मार्ग बताया, जबकि तुकडोजी महाराज का संदेश—‘ईश्वर भक्ति ही मानव सेवा है’—आज भी मानवता के सामूहिक उत्थान का मार्गदर्शन करता है।”

इस आयोजन का उद्देश्य सभी धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर गुरु तेग बहादुर जी और बाबूजी महाराज के सत्य, एकता और सार्वभौमिक चेतना के संदेश को आत्मसात करना है, साथ ही तुकडोजी महाराज की सेवा भावना को भी आगे बढ़ाना है।

गुरु तेग बहादुर जी, जिन्हें “हिंद दी चादर” के नाम से भी जाना जाता है, ने धार्मिक स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका संदेश था कि व्यक्ति न तो किसी से डरे और न ही किसी को डराए।

इस वर्ष बाबूजी महाराज की जयंती के साथ गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी वर्ष और तुकडोजी महाराज की शिक्षाओं का संगम इस आयोजन को और भी विशेष बनाता है, जो एकता, सेवा और आध्यात्मिकता का संदेश देता है।

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