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चालिस साल बाद मिला शहीद की विधवा को इंसाफ

हाईकोर्ट के नगर निगम को २५ बीघा जमीन देने के आदेश, साल १९८७ में डयूटी के दौरान आर्मी सैंपर ऑपरेटर अजमेर अली हो गए थे शहीद

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मेरठ/सिस्टम कितना लचर है और सुस्ती से काम करता है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहीद की विधवा को इंसाफ देने में चालिस साल लगा दिए। रोहटा रोड के गांव शोभापुर के रहने वाले आर्मी सैपर ऑपरेटर अजमेर अली साल जिन्हें उनके शानदार कामों के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है, डयूटी के दौरान वह शहीद हो गए, लेकिन उनकी विधवा को इंसाफ देने में चालिस साल का वक्त गुजार दिया गया। अब हाईकोर्ट ने शहीद की विधवा को इंसाफ दिया है। हाईकोर्ट ने नगर निगम को शहीद की विधवा को २५ बीघा जमीन दिए जाने के आदेश दिए हैं।
यह है मामला
कीर्ति चक्र से सम्मानित अजमेर अली निवासी ग्राम शोभापुर रोहटा रोड सेना में सैपर ऑपरेटर के पद पर तैनात थे और साल १९८७ में लेह लद्दाख में १८०० फिट की ऊंचाई पर उनकी तैनाती थी। शून्य से नीचे तापमान पर ड्यूटी के दौरार वह शहीद हो गए। जहां उनकी डयूटी थी वहां मौसम बेहद बादल भरा था । वातावरण और बर्फीली हवा जैसी कठोर जलवायु परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी जान की परवाह के बिना बहादुर ऑपरेटर ने बड़े उत्साह और दृढ़ता के साथ काम करना जारी रखा था कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा और अपने काम पर अनुकरणीय गर्व का प्रदर्शन किया ।ऑपरेशन के दौरान वह डोजर के साथ हिमस्खलन में दब गए । अजमेर अली ने भारी बाधाओं और कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सराहनीय दृढ़ता और असाधारण साहस का प्रदर्शन किया, जिसके लिए राष्ट्रपति ने 22 मार्च 1987 को शहीद अजमेर अली को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया था ।
शहीद की विधवा ने मांगा मुआवजा
याची शहीद की पत्नी के पास खेती के लिए भूमि न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याची की ओर से अधिवक्ता सुनील चौधरी ने हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति नीरज तिवारी व न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की बेंच में बहस में बताया कि शासन व नगर निगम की नीतियों के अनुसार अबरीशा ने 25 बीघा जमीन आवंटित किए जाने की मांग केंद्र सरकार व राज्य सरकार से की थी। जिला सैनिक कल्याण व पुर्नवास अधिकारी मेरठ ने याची की मांग को जायज मानते हुए नगर आयुक्त को जमीन आवंटित करने हेतु प्रचलित नियमावली के अंतर्गत जमीन आवंटित करने हेतु पत्र भेजा था लेकिन याची को कोई जमीन आवंटित नही हुई। याची के अधिवक्ता सुनील चौधरी को सुनकर हाईकोर्ट ने उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम की धारा 129(5) के अंतर्गत याची की मांग पर नियमानुसार नगर आयुक्त को 6 सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश पारित किया। नगरायुक्त ने बताया कि अभी कोर्ट का आदेश नहीं मिला है। नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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