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अफसरों को सता रहा जेल जाने का डर

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अफसरों को सता रहा जेल जाने का डर
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2 सितंबर के बंद को नवीन गुप्ता का समर्थन, अजय गुप्ता का रूख साफ नहीं, पार्टी के खिलाफ माहौल के चलते भाजपा नेताओं की दूरी बनाने की मजबूरी

मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट प्रकरण में १४ जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों में देरी मामले को लेकर आवास विकास के अफसरों को जेल जाने का डर सताने लगा है। दरअसल १४ जुलाई को हुई सुनवाई के बाद सुप्रीमकोर्ट के आदेश में कहा गया है कि जिन ४४ भवनों को सील किया गया है, उनको डी-सील कर भूखंड़ को मूल स्वरूप में लाया जाए। इस आदेश के बाद आवास विकास अफसरों को संबंधित भूखंड़ों को आवंटन के समय जो उनका स्वरूप था, उसी में लाना था, लेकिन जिन ४४ भूखंडों को सील किया गया है उनमें से अभी तक एक भी आवंटन के समय उसका जो स्वरूप था, उसमें नजर नहीं आ रहा है। इस बीच जानकारी मिली है कि इस ेमामले को सुप्रीमकोर्ट तक पहुंचाने वाले पक्षकारों ने इसको लेकर अवमानना का एक ओर मामला आवास विकास अफसरों के खिलाफ दायर करने की तैयारी कर ली है। हालांकि इसकी अधिकृत पुष्टि अभी नहीं कोई भी करने को तैयार है, लेकिन अपुष्ट सूत्रों की मानें तो आवास विकास के अफसरों के खिलाफ ऐसा करने की पूरी तैयारी कर ली गयी है। यदि वाकई ऐसा होता है तो जानकारों का कहना है कि आवास विकास के अफसरों या किसी एक अफसर को जेल भेजा जा सकता है। जानकारों की मानें तो इस आशंका से आवास विकास अफसरों की नींद उड़ी हुई है, लेकिन जो हालात शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट के बने हुए हैं उसके चलते आवास विकास अफसर वेट एंड वॉच की कंडीशन में हैं। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का माहौल इस वक्त बेहद बुरी तरह से गरमाया हुआ है। पिछले दिनों आवास विकास कार्यालय पर आवंटियों और नर्सिंगहोम संचालकों का जितना बड़ा प्रदर्शन हुआ, उसके बाद अफसर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।

धरी रह गयी अफसरों की प्लानिंग

आवंटियों और नर्सिंगहोम संचालकों के प्रदर्शन के साइड इफैक्ट की यदि बात की जाए तो उसका सबसे ज्यादा असर ही अफसरों पर देखने को मिल रहा है। नाम ना छापे जाने की शर्त पर एक नर्सिंगहोम संचालक ने बताया कि प्रदर्शन के बाद आवास विकास प्रशासन की ओर से संदेश और सफाई दी गयी कि नर्सिंगहोम संचालक धरना प्रदर्शन ना करें। उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होने जा रही है। जो नोटिस चस्पा किए गए वो अब भविष्य में नहीं किए जाएंगे। नोटिसों को लेकर किसी प्रकार परेशान होने की भी बात नहीं है, लेकिन अब धरना या आंदोलन में शामिल होने की जरूरत नहीं है। बताया जाता है कि इसके बाद नर्सिंगहोम संचालक बैकफुट पर आ भी गए थे, लेकिन अफसरों की इस प्लानिंग पर शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट के लोगों ने पानी फेर दिया। तय किया गया कि नर्सिंगहोम संचालक और आवंटी एक साथ मिलकर आंदोलन करें ताकि लड़ाई मजबूती से लड़ी जा सके। नर्सिंेगहोम संचालकों के बात समझ में आ गयी और वो दोबारा आंदोलन का हिस्सा बन गए।

2 सितंबर के बंद को नवीन गुप्ता का समर्थन

आशियानों और कारोबार को बचाने के लिए आंदोलन करने वालों के 2 सितंबर को मेरठ बंद को संयुक्त व्यापार संघ निर्वाचित के नवीन गुप्ता ने समर्थन का एलान किया है, लेकिन अजय गुप्ता नटराज वाला व्यापार संघ अभी तस्वीर साफ करने को तैयार नहीं है। दरअसल 2 सितंबर को मेरठ बंद की कॉल देने वालों के निशाने पर भाजपा और सरकार है। उनके प्रदर्शनों में भाजपा निशाने पर है। ऐसे में व्यापार संघ समेत भाजपा नेताओं के दूसरे नेताओं के सामने मुसीबत यह है कि जहां संगठन और सरकार को भला बुरा कहा जा रहा हो वहां जाकर कैसे खड़े हों, लेकिनद माना जा रहा है कि 2 सितंबर का बंद सफल होने जा रहा है। शास्त्रीनगर और सेंट्रल मार्केट के आंदोलनकारी महानगर के तमाम बाजारों यहां तक कि गांव देहात के बाजारों में संपर्क के दौरान यह समझानपे में कामयाब नजर आ रहे हैं कि जो हाल शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट का कर दिया गया है वो हाल भविष्य में तुम्हारा भी होगा। इसलएि उस हालात से बचने के लिए एकजुटता दिखाना जरूरी है। यह बात लोगों के समझ में आ रही है।
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