नई दिल्ली। कश्मीरी पंडितों के पलायन के समय (1989-1990) केंद्र में वी.पी. सिंह की सरकार थी, जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बाहर से समर्थन दे रही थी। विपक्षी दल मानते हैं कि उस दौरान भाजपा समर्थित सरकार और तत्कालीन प्रशासन (विशेषकर राज्यपाल जगमोहन) कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रहे। यह भी सवाल उठाया जाता है कि पर्याप्त राजनीतिक प्रभाव होने के बावजूद भाजपा ने सरकार पर दबाव क्यों नहीं बनाया। विपक्षी दल मानते हैं कि उस दौरान भाजपा समर्थित सरकार और तत्कालीन प्रशासन (विशेषकर राज्यपाल जगमोहन) कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल रहे। यह भी सवाल उठाया जाता है कि पर्याप्त राजनीतिक प्रभाव होने के बावजूद भाजपा ने सरकार पर दबाव क्यों नहीं बनाया।
भाजपा की सफाई कांग्रेस ने नकारी
भाजपा और उसके समर्थकों का मानना है कि इस पलायन के लिए मुख्य रूप से उस समय की राज्य सरकारें (जैसे नेशनल कॉन्फ्रेंस) और सीमा पार से पोषित आतंकवाद जिम्मेदार था। उनका तर्क है कि पार्टी ने हमेशा कश्मीरी पंडितों के दर्द को उठाया है और बाद में अनुच्छेद 370 को हटाकर तथा पुनर्वास के कदम उठाकर स्थिति सुधारने का प्रयास किया है। हालांकि विपक्षी दल खासतौर से कांग्रेस तो इस बात को मानने के लिए ही तैयार नहीं कि धारा 370 को हटा दिया गया है। कांग्रेस का दावा है कि यदि धारा 370 को हटा दिया गया है तो सरकार उसका दस्तावेज देश के सामने पेश करे। विवेक अग्निहोत्री और अनुपम खेर सरीखे कुछ लोगों का दावा है कि कश्मीर फाइल्स जैसी फिल्मों से कश्मीरी पंड़ितों की समस्या दूर हो जाएगी। यह केवल भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए भ्रामक प्रचार है।
घाटी पर फिर चस्पा किए पोस्ट
‘न डरेंगे, न भागेंगे’ धमकी भरे पत्र के बाद कश्मीरी पंडितों ने J&K में सुरक्षा की मांग की
घाटी में एक बार फिर से धमकी भरे पोस्टर नजर आने लगे हैं। यह पोस्टर किसी यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (यूएलसी) नाम के संगठन ने जारी किया है और इस पर 23 अगस्त की तारीख लिखी है। धमकी के जवाब में कश्मीरी पंडित समुदाय के एक कर्मचारी ने कहा है कि वह “न तो डरेगा और न भागेगा।” PM Package कश्मीरी पंडित फोरम के मुताबिक, पोस्टर में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी दी गई है और इसमें कथित तौर पर कुछ लोगों की निजी और संवेदनशील जानकारी भी दी गई है, जिसमें उनके नाम, पते और गाड़ियों के नंबर शामिल हैं। फोरम ने कहा, “पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अभी तक पोस्टर की असली होने की पुष्टि नहीं की है। लेकिन उनमें संवेदनशील निजी जानकारी होना, गंभीर चिंता का विषय है।” धमकियों को लेकर कश्मीरी पंडित समुदाय के एक कर्मचारी ने कहा कि वे इस तरह की धमकियों से न तो डरेंगे और न भागेंगे। कर्मचारी ने कहा, “हम इस बार न तो डरेंगे और न भागेंगे। कश्मीर हमारा भी है। यह हमारी जन्मभूमि है…अगस्त के पहले हफ्ते में भी एक धमकी भरा पत्र जारी किया गया था। कर्मचारी ने कहा, “मैं प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से अनुरोध करता हूं कि वे पता लगाएं कि इन धमकी भरे पत्रों को कहां से जारी किया जा रहा है और उन्हें यह सारी जानकारी कौन दे रहा है।”
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