नई दिल्ली। बातचीत के तमाम रास्ते लगभग बंद होने तथा स्ट्रेट होर्मूज ना खुलवा पाने के बाद अमेरिका ने युद्ध का रास्ता अख्त्यार कर लिया है। अमेरिका किसी भी वक्त ईरान पर भारी एयर स्ट्राइक को तैयार है। केवल अमेरिका ही नहीं इजरायल समेत खाड़ी में उसके मित्र देश भी ईरान पर हमले को अलर्ट मोड पर हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान की ओर से कहा गया है कि यदि उसने देश पर किसी भी हमले की हिमाकत की तो उसका उसी अंदाज में जवाब दिया जाएगा। जवाब इतना सटीक होगा कि दुश्मन को उसकी उम्मीद भी नहीं होगी। इस बीच ईरानियों ने यह तय मान लिया है कि हर हाल में एयर स्ट्राइक होनी है। इसी के चलते उन्होंने खुद को इमरजैंसी मोड में रखा है। ईरानी महिलाएं एलएलआर यानि सेल्फ लोडिंग राइफलों को चलाने की ट्रेनिंग ले रही हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ जंग को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता का पैमाना धड़ाम हो गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दुनिया को यह कह कर चौंका दिया है कि ईरान पर हमले की पूरी तैयारी थी। लेकिन एन मौके पर कुछ मित्र देशों के आग्रह पर हमला टाल दिया गया है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी खुलासा किया कि ईरान के साथ बेहद टॉप लेबल पर बातचीत चल रही है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा सीजफायर किसी भी वक्त एक बड़े युद्ध में बदल सकता है। आज ट्रंप ने कहना है कि अमेरिकी सेना को ईरान पर फिर से हमला करना पड़ सकता है। व्हाइट हाउस में बोलते हुए, ट्रंप ने बताया कि नौसेना के जहाज मिसाइलों और अन्य हथियारों से पूरी तरह लैस थे और हमले के लिए तैयार खड़े थे।
एक ईरानी अधिकारी का कहना है कि किसी भी क्षण बड़े पैमाने पर हमले की अमेरिकी धमकी का “दृढ़तापूर्वक” सामना किया जाएगा और ईरान ” किसी भी हमलावर हिमाकत का मजबूती से सामने करने काे तैयार है, पलटवार बेहद माकूल और मजबूत होगा। इतना ज्यादा मजबूत की दुश्मन को अफसोस होगा कि वह ईरान से क्यों भिड़ा।
ईरान पर जंग थोपने के मसले पर दुनिया ही नहीं अमेरिकन भी डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ हैं। एक दिन पहले जारी की सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स/सिएना के एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 64 प्रतिशत अमेरिकी उत्तरदाताओं का मानना था कि ईरान के साथ युद्ध में जाने का ट्रंप का निर्णय गलत था। 22 प्रतिशत रिपब्लिकन, 93 प्रतिशत डेमोक्रेट और 73 प्रतिशत राजनीतिक रूप से स्वतंत्र लोगों का मानना था कि युद्ध में जाना गलत विकल्प था। 53 प्रतिशत अमेरिकियों ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के पास युद्ध में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है; तीन-चौथाई लोगों ने अमेरिका में गैस की कीमतों में वृद्धि के लिए प्रशासन को दोषी ठहराया। ये निष्कर्ष ऐसे समय में सामने आए हैं जब एनवाईटी/सिएना सर्वेक्षण के अनुसार, ट्रंप की अनुमोदन रेटिंग उनके कार्यकाल में अब तक के सबसे निचले स्तर पर, 37 प्रतिशत पर आ गई है।
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