मेरठ। शास्त्रीनगर सेक्टर दो में आवास विकास परिषद की टीम ने आज फिर से मकानों पर नोटिस चस्पा कर दिए। ज्यादातर नोटिस छोटे मकानों यानि 35 गज के मकानों पर चस्पा किए गए हैं। नोटिस चस्पा होने की जानकारी जैसे ही महिलाओं को लगी जो वहां आ धमकी और हंगामा कर दिया। उन्होंने मकानों पर चस्पा किए गए नोटिस फाड़ दिए। नोटिस को लेकर खूबखरीखोटी सुनाई। हंगामा के दौरान कई महिलाएं बेहोश हो गयीं। यह देखकर वहां से पुलिस फोर्स और आवास विकास की टीम निकल गयी। इसी बीच वहां कुछ संघ और भाजपा के कार्यकर्ता पहुंच गए। उन्हें देखकर महिलाएं सरकार को खरीखोटी सुनाने लगी तो उन्हें चुप कराने का प्रयास किया और कहा कि सरकार के खिलाफ कुछ ना बोंले, लेकिन महिलाएं चुप नहीं हुईं। देर तक हंगामा चलता रहा। इस बीच आवास विकास के अधिकारी दोबारा नोटिस चस्पा करने पहुंच गए।
शास्त्री नगर स्थित सेंट्रल मार्केट के सेक्टर-2 में गुरुवार से नोटिस चस्पा करने की कार्रवाई शुरू की गई। आवास विकास की टीम नोटिस चस्पा करने पहुंची तो स्थानीय महिलाओं ने टीम का फिर से विरोध किया और नोटिस नहीं लगने दिया। हंगामे को देख मौके पर सीओ सिविल लाइन सुचिता सिंह और नौचंदी थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे। लोगों को समझने का प्रयास किया। वहीं महिलाओं का कहना है कि किसी भी कीमत पर वह अपने प्रतिष्ठानों पर नोटिस नहीं लगने देंगी। लोगों ने लगाए गए नोटिस को फाड़ दिया है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन के नाम पर उनको धोखा दिया है। महिलाओं की मुख्य रूप से यही मांग है कि उनके मकान 35 से 40 मीटर में बने हुए हैं। ऐसे में यदि वह 1 मीटर सेटबैक छोड़ देंगी तो उन पर रहने का संकट आ जाएगा। इसलिए उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि ना ही वह इस नोटिस को कुछ समझते हैं और ना ही अब वह सेटबैक छोड़ेंगी। इसके साथ-साथ जो धरना 15 दिन चलने के बाद सांसद अरुण गोविंद ने आश्वासन देकर खत्म कराया, वह धोखा देना है।
सेटबैक छोडा तो मकान बेचगा ही कहां
35 मीटर का मकान जिसमें यदि आगे पीछे सेटबैक छोड़ दिए गए तो फिर मकान बेचगा ही का। वहीं दूसरी ओर आवास विकास परिषद ने जो नोटिस लगाए हैं उनमें दो तरह के नोटिस एक भवन पर लगाए जा रहे हैं। पहला नोटिस वो है जिसमें आवांटन का वक्त का स्टेटस है जिसमें किसी प्रकार के सेटबैक की बात नहीं बतायी गयी है दूसरा जो वर्तमान का नोटिस है उसमें सेटबैक छोड़े जाने का फरमान जारी कर दिया है। महिलाओं का कहना है कि आवंटन के समय जो स्टेटस था वहीं तो माना जाना चाहिए। विरोध कर रही औरतों ने तर्क दिया कि खुद आवास विकास मान रहा है कि आवंटन के समय सेटबैक नहीं था, लेकिन अब इतने साल बाद आवास विकास को छोटे मकानों पर भी सेटबैक चाहिए।
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