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रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन “शांति दूत” बनने पर उतारू

रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन "शांति दूत" बनने पर उतारू

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रूस-यूक्रेन युद्ध में चीन "शांति दूत" बनने पर उतारू
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नई दिल्ली। चीन रूस-यूक्रेन युद्ध में “शांति दूत” के रूप में खुद को पेश कर रहा है, लेकिन वास्तव में वह मॉस्को के साथ घनिष्ठ रणनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए रखते हुए युद्ध में अपनी भूमिका का आकलन कर रहा है। पश्चिमी देशों की ओर से चीन द्वारा रचनात्मक भूमिका निभाने के दबाव के बीच, बीजिंग ने यूक्रेन की संप्रभुता का सम्मान करने का दावा किया है, लेकिन साथ ही रूस के सुरक्षा चिंताओं को भी जायज ठहराया है। रूस और यूक्रेन के बीच लंबी चली आ रही जंग में अचानक चीन भी कूद पड़ा है, लेकिन चीन का मकसद इस जंग में खुद को दुनिया भारत और अमेरिका के इतर विश्व गुरू साबित करने का है। बीजिंग का उद्देश्य खुद को ग्लोबल साउथ के एक बड़े नेता के रूप में पेश करना और यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण पश्चिमी देशों का ध्यान अपनी ओर से हटाना है। चीन का प्रयास रूस यूक्रेन जंग को खत्म करने की दिशा में देखे जा रहे हैं। हालांकि रूस और यूक्रेन दोनों ही जंग खत्म करना चाहते हैं, लेकिन रूस के लगातार भारी हमलों के चलते यूक्रेन भी पीछे हट रहा है, जिसकी वजह से दोनों के बीच शांति स्थापित नहीं हो पा रही है। जानकारों का मानना है कि यूक्रेन में ड्रोन हमलों की तीव्रता यह दर्शाती है कि युद्ध अभी भी किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंचा है, जबकि चीन अपनी कूटनीतिक सक्रियता के माध्यम से युद्ध को प्रभावित करने और अपनी वैश्विक छवि को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। चीन की रूस यूक्रेन जहंग खत्म करने की कोशिशों के बावजूद, चीन की स्थिति को अक्सर “समर्थक-रूसी तटस्थता” कहा जाता है, क्योंकि वह रूस को महत्वपूर्ण दोहरे उपयोग वाली (dual-use) तकनीक प्रदान करना जारी रखता है। बीजिंग का उद्देश्य खुद को ग्लोबल साउथ के एक बड़े नेता के रूप में पेश करना और यूक्रेन-रूस युद्ध के कारण पश्चिमी देशों का ध्यान अपनी ओर से हटाना है। हालांकि चीन ने खुद को एक “तटस्थ” और “रचनात्मक” पक्ष के रूप में प्रस्तुत करते हुए, रूस-यूक्रेन संघर्ष के राजनीतिक समाधान के लिए कूटनीतिक कोशिशें तेज कर दी हैं। चीन और ब्राजील ने मिलकर एक छह-सूत्रीय शांति योजना पर जोर दिया है, जो बातचीत के माध्यम से संघर्ष के अंत की वकालत करती है। मई 2026 की शुरुआत में यूक्रेन-रूस युद्ध अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और इसमें ड्रोन तकनीक का उपयोग अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गया है। साथ ही, वैश्विक कूटनीति में चीन की भूमिका काफी सक्रिय हो गई है। यूक्रेन ने अपनी रक्षात्मक स्थिति से आगे बढ़कर आक्रामक ड्रोन तकनीक में बड़ी बढ़त हासिल की है। यूक्रेनी ड्रोन रूसी ऊर्जा बुनियादी ढांचे और तेल डिपो को निशाना बना रहे हैं। रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले जारी रखे हैं। 1 मई 2026 को, यूक्रेन ने आरोप लगाया कि रूस ने एक दिन में 400 से अधिक ड्रोन (मुख्य रूप से शाहिद-प्रकार) से हमला किया।

दोनों को भारी नुकसान

करीब छह साल से चली आ रही इस जंग में रूस और यूक्रेन दोनों को ही भारी नुकसान अब तक उठाना पड़ा है। इन हमलों में नागरिक बुनियादी ढांचे और आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे आम नागरिकों की मौत और घायल होने की संख्या बढ़ रही है। दोनों ओर जान ओ माल का भारी नुकसान हुआ है। रूस ने पूर्व में ‘फोर्ट्रेस बेल्ट’ में घुसपैठ की कोशिशें तेज की हैं, लेकिन यूक्रेन के अनुसार उसकी सीमा सुरक्षा मजबूत बनी हुई है। इस सब के जंग खत्म कराने के नाम पर की जा रही चीनी कोशिशें यदि रंग लाती हैं तो यह दुनिया के लिए राहत भरी खबर होगी।
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