नई दिल्ली। अमेरिका द्वाराबंदरगाहों की नॉकेबंदी ने ईरानी की आर्थिक कमर तोड़कर रख दी है। अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरान में गहरा आर्थिक संकट (सैलरी देने तक के पैसे नहीं) पैदा हो गया है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों और कुछ सैन्य कर्मियों को लगातार दूसरे महीने से वेतन नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस और कुछ अन्य सुरक्षा इकाइयों को भी वेतन मिलने में देरी हो रही है, जिससे उनका मनोबल प्रभावित हुआ है। मेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान का तेल निर्यात रुक गया है, जो उसकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया है, जिससे नकदी (Cash) की भारी कमी हो गई है। लेकिन याद रहे कि ईरान को लेकर इस प्रकार की बातें अमेरिका कर रहा है। हालाँकि, ये दावें मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए गए हैं। ग्राउंड रिपोर्ट को लेकर पश्चिमी मीडिया जानकारी जुटा रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नौसैनिक दबाव से युद्ध का तनाव चरम पर है। डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज में ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं हालात इतने ज्यादा खराब हैं कि ईरानी सरकार अपने कर्मचारियोें को सेलरी तक नहीं दे पा रही है। सेलरी ना मिलने की वजह से असंतोष व्याप्त है। वहीं दूसरी ओर यूएस और ईरान एक बार फिर से टकराव की ओर बढ़ रहे हैं। पश्चिमी विशेषज्ञों और ईरान व यूएस का भी मानना है कि यदि हालात नहीं सुधरे और बीच का रास्ता नहीं निकला तो टकराव तय है। इस बार का टकराव पहले से कई गुना ज्यादा नुकसानदेह साबित होगा। अमेरिका की पूरी कोशिश है कि किसी प्रकार ईरान के साथ लड़ाई छिड़ने की नौबत ना आए, क्योंकि अमेरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान से जंग मोल लेने के चलते बुरे राजनीतिक और प्रशासनिक हालात का सामना करना पड़ रहा है। बंदरगाहों की नॉकाबंदी के चलते ईरान में उत्पादन कटौती का खतरा आसन्न है। नाकाबंदी के कारण ईरान का तेल भंडार (लगभग 12-22 दिन का बैकअप) भर चुका है, जिससे उत्पादन में 15 लाख बैरल की कटौती का खतरा है। हालांकि ईरान ने युद्ध समाप्त करने के बदले में होर्मुज से नियंत्रण हटाने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन ट्रंप प्रशासन ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। ह तनाव वैश्विक तेल बाजार पर भारी पड़ रहा है और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष की आशंका को बढ़ा रहा है।
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