Home Uncategorized 35 लाख से तालाब निर्माण मे हुई भ्रष्ट्राचार की पुष्टि तो कार्यवाही मे देरी क्यो?
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35 लाख से तालाब निर्माण मे हुई भ्रष्ट्राचार की पुष्टि तो कार्यवाही मे देरी क्यो?

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कासगंज जनपद के विकास खण्ड क्षेत्र गंजडुंडवारा के गांव सिकंदरपुर ढाव में लघु सिंचाई विभाग द्वारा 35 लाख से कराए गए तलाब निर्माण मे भ्रष्ट्राचार, गबन सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए। शिकायत पर गठित जांच टीम बैठाई गई।जांच रिर्पोट में प्रथम दृष्टया तालाब निर्माण मे घालमेल की पुष्टि भी हुई थी।लेकिन लकिन अभी तक इस मामले में कोई कार्यवाही अभी तक नहीं हुई है। शिकायकर्ता ने मुख्यमंत्री सहित सूबे के वरिष्ठ अधिकारियो से कठोर कार्यवाही की मांग की है।

आपको बता दे की  वर्ष 2023-24 मे 35 लाख से तालाब का निर्माण कराया गया था।शिकायकर्ता अंकुर बाबू का आरोप था तालाब निर्माण को चिह्नित जगह ही मानक के विरुद्ध थी।वही शिकायतकर्तानुसार तालाब भी नदारद था।शिकायकर्ता द्वारा अधिशासी अभियंता अभिराम प्रसाद लघु सिचाई खण्ड अलीगढ के संरक्षण मे अवर अभियंता उमेश कुमार द्वारा अपने संगे सम्बंधियो को ठेका दे तालाब निर्माण कराए बिना विभागीय मिलीभगत से भुगतान करा गबन सहित भ्रष्ट्राचार के गंभीर आरोप लगाए गए।शिकायत पर प्रकरण की जांच को प्रमुख सचिव लधु सिचाई,लखनऊ द्वारा अधीक्षण अभियंता मेरठ को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए गए।अधीक्षण अभियंता द्वारा जांच को तीन सदस्यी जांच कमेटी का गठन किया गया।अधिशासी अभियंता लघु सिचाई खण्ड हापुड की अध्यक्षता मे जांच को तीन सदस्यी बनाई गई।कमेटी मे अधिशासी एवं सहायक अभियंता लघु सिचाई को शामिल किया गया।जनवरी माह मे जांच कमेटी  के अध्यक्ष अधिशासी अभियंता लघु सिचाई हापुड नवीन कुमार द्वारा टीम के सदस्यो के साथ मौके पर पहुंची।सम्बंधित स्थल के आस पास पानी भरा होने के चलते चिह्नित स्थल तक न पहुंच सकी।अधिकारियो द्वारा मौजूद ग्रामीणो से जानकारी जुटाई गई।शिकायत के बिन्दुओ पर जांच पड़ताल की गई और वापस चले गए थे।

कमेटी के अध्यक्ष अधिशासी अभियंता लघु सिचाई हापुड नवीन कुमार द्वारा मौके पर जांच उपरांत 13 फरवरी को अधीक्षण अभियंता मेरठ को सौपी जांच रिर्पोट में प्रथम दृष्टया तालाब निर्माण में अनिमियतताओ की पुष्टि की थी।जांच रिर्पोट मे तालाब निर्माण स्थल के चयन को ही गलत बताया गया है।क्यों कि जिस स्थल पर तालाब निर्माण की स्वीकृति दी गई थी।वहाँ गंगा नदी समीप होने के चलते वाटर लेवल उर्पयुक्त होने के चलते तालाब की आवश्यकता ही नही थी।अधीक्षण अभियंता मेरठ अलोक सिन्हा द्वारा प्राप्त रिर्पोट को मुख्य अभियन्ता,लघु सिचांई,लखनऊ को भेजा जा चुका है।लेकिन सौपे गई रिपोर्ट जाने के बाद भी दोषियो पर कार्यवाही नही की गई। अंकुर बाबू का कहना है तालाब निर्माण मे दायित्वो के निर्वहन हेतु विभागीय दिशा निर्देशों के अनुसार अधिशासी अभियंता अलीगढ अभिराम वर्मा एवं सहायक अभियंता मुकीम अहमद की संलिप्तता जांच उपरांत स्पष्ट हो चुकी है।लेकिन प्रकरण मे शासन द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नही की गई।जो कि कई सवाल खडे कर रही है।

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