गोमती नगर के 393 भवनों के ARV पुनरीक्षण पर सवाल, नगर निगम जोन-4 की कार्यप्रणाली कठघरे में, विराम खंड-5 में वर्ष 2010 से पुनरीक्षण न होने का आरोप, अन्य भवनों के मूल्यांकन में बदलाव की बात से उठे सवाल
लखनऊ (अरिमर्दन)। नगर निगम लखनऊ के जोन-4 अंतर्गत गोमती नगर के विराम खंड-5 में 393 भवनों के वार्षिक मूल्यांकन (ARV) के पुनरीक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इन भवनों का वर्ष 2010 से अब तक एक बार भी पुनरीक्षण नहीं किया गया, जबकि क्षेत्र के कई अन्य भवनों का वर्ष 2014, 2018 और 2022 में पुनरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है। यदि यह जानकारी अभिलेखों से सही साबित होती है, तो नगर निगम की मूल्यांकन प्रक्रिया में समानता और पारदर्शिता की जांच आवश्यक हो जाती है।
इस मामले में जोनल अधिकारी शिल्पा कुमारी और राजस्व निरीक्षक शालिनी त्रिपाठी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने दोनों अधिकारियों की कथित मिलीभगत से पुनरीक्षण लंबित रखे जाने का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी आवश्यक है।
नगर आयुक्त से शिकायत की बात पर भी विवाद
शिकायतकर्ता के अनुसार, जब इस मामले को नगर आयुक्त गौरव कुमार के समक्ष उठाने की बात कही गई, तो राजस्व निरीक्षक शालिनी त्रिपाठी ने कथित तौर पर उन्हें अपने और जोनल अधिकारी के विरुद्ध नगर आयुक्त से शिकायत करने की बात कही। इस कथित बातचीत की परिस्थितियों और वास्तविकता की भी जांच की जानी चाहिए।
अभिलेखों की जांच से सामने आ सकता है सच
मामले में मांग उठ रही है कि विराम खंड-5 के सभी 393 भवनों की वर्षवार ARV सूची, पुनरीक्षण से संबंधित आदेश, कर निर्धारण अभिलेख तथा अन्य समान प्रकृति के भवनों के मूल्यांकन रिकॉर्ड की जांच कराई जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि कुछ भवनों का पुनरीक्षण होने और इन 393 भवनों का पुनरीक्षण लंबित रहने के पीछे क्या कारण थे।
नगर आयुक्त से अपेक्षा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर, यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी निर्धारित की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।
अब मुख्य सवाल यह है कि क्या नगर निगम प्रशासन इन 393 भवनों के ARV पुनरीक्षण से जुड़े अभिलेखों की जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करेगा?
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